▪️ 165 करोड़ के अमृत मिशन से हसदेव को मिलेगा नया जीवन, उद्योगों को मिलेगा उपचारित जल!
कोरबा, 08 अप्रैल 2026। ऊर्जाधानी कोरबा के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘अमृत मिशन 2.0’ योजना के तहत कोरबा की जीवनरेखा, हसदेव नदी को प्रदूषण के अभिशाप से मुक्त करने के लिए 165 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरते ही कोरबा देश के उन चुनिंदा 12 शहरों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहाँ दूषित जल के शोधन की सबसे उन्नत टर्शरी ट्रीटमेंट तकनीक उपलब्ध है।
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नालों का ‘विष’ अब बनेगा ‘अमृत’
सालों से शहर के 11 बड़े नालों की गंदगी सीधे हसदेव नदी में मिलकर उसे प्रदूषित कर रही थी। अब इस गंभीर समस्या का वैज्ञानिक समाधान खोज लिया गया है। भारत सरकार द्वारा स्वीकृत राशि से शहर में 20 एमएलडी (MLD) क्षमता का अत्याधुनिक टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा।
मुख्य विशेषताएं:
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प्रदूषण पर प्रहार: प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ 30 लाख लीटर दूषित जल को नदी में गिरने से पहले ही रोककर उपचारित किया जाएगा।
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वेस्ट टू वेल्थ: यह प्रोजेक्ट केवल सफाई तक सीमित नहीं है। उपचारित पानी को NTPC जैसे बड़े उद्योगों को निर्धारित दरों पर बेचा जाएगा।
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राजस्व में वृद्धि: पानी की बिक्री से नगर निगम के राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी।
“यह परियोजना कोरबा के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के मानकों का पालन करते हुए हम हसदेव को पुनर्जीवित करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह प्लांट आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण की एक मिसाल बनेगा।” — श्री कुणाल दुदावत, कलेक्टर, कोरबा
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औद्योगिक प्रगति और पर्यावरण का तालमेल
वर्तमान में इस विशाल परियोजना के लिए निविदा (Tender) प्रक्रिया जारी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस प्लांट के शुरू होने से न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि उद्योगों को अपनी जरूरतों के लिए साफ पानी मिलेगा, जिससे हसदेव नदी पर औद्योगिक दबाव भी कम होगा।
यह कदम कोरबा को एक ‘स्मार्ट और सस्टेनेबल’ इंडस्ट्रियल हब के रूप में वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करेगा। अब हसदेव की लहरें फिर से कल-कल करेंगी और शहर प्रदूषण के काले साये से मुक्त होकर स्वच्छ हवा और पानी की सांस ले सकेगा।









