कोरबा छत्तीसगढ़ 6 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पदस्थ बुजुर्ग मर्चुरी कर्मचारी बालकृष्ण चनैया ने सोमवार सुबह दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर फैलते ही अस्पताल छावनी में तब्दील हो गया और कर्मचारियों ने काम बंद कर मर्चुरी में ताला जड़ दिया है।
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विवाद की जड़: बस ‘थोड़ा इंतजार’ करने को कहा था
घटना 30 मार्च की है, जब बेंदरकोना के सरपंच जयवीर सिंह ठाकुर एक ग्रामीण के शव का पोस्टमार्टम कराने अस्पताल पहुंचे थे। सरपंच प्रक्रिया में तेजी लाने का दबाव बना रहे थे। जब बालकृष्ण चनैया ने काम की व्यस्तता का हवाला देते हुए कुछ देर रुकने का अनुरोध किया, तो सरपंच आगबबूला हो गए।
आरोप है कि सरपंच ने बुजुर्ग कर्मचारी का सिर पकड़कर दीवार पर दे मारा। इस हमले में बालकृष्ण के सिर में गंभीर चोट आई और अंदरूनी खून का थक्का जम गया। वे पिछले 6 दिनों से आईसीयू में वेंटिलेटर पर थे।
अस्पताल में आक्रोश: काम-काज ठप
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सोमवार सुबह जैसे ही चनैया के निधन की खबर मिली, अस्पताल कर्मियों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।
तालाबंदी: आक्रोशित कर्मचारियों ने मर्चुरी और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया है।
मांग: परिजनों और स्टाफ की स्पष्ट मांग है कि जब तक हत्यारे सरपंच की गिरफ्तारी नहीं होती, वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे और प्रदर्शन जारी रखेंगे।
प्रशासनिक पहल: अस्पताल अधीक्षक डॉ. गोपाल कंवर और सह-अधीक्षक डॉ. रविकांत जाटवर लगातार कर्मचारियों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद हैं। आरोपी सरपंच के खिलाफ पहले ही धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज था, जिसे अब धारा 302 (हत्या) में तब्दील किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सुरक्षा पर सवाल
यह घटना सरकारी अस्पतालों में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक सेवाभावी बुजुर्ग कर्मचारी की महज इसलिए जान चली गई क्योंकि उसने नियम और प्रक्रिया का पालन करने को कहा था। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से न्याय सुनिश्चित करता है।
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