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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों को भी मिलेंगे बोनस अंक

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 21 मार्च: बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने वाले सभी कर्मचारी, चाहे वे सीधे सरकारी तौर पर नियुक्त हों या किसी निजी संस्था (आउटसोर्सिंग/प्लेसमेंट एजेंसी) के माध्यम से, नई सरकारी भर्तियों में बोनस अंकों के पात्र होंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्वास्थ्य विभाग की नई भर्ती प्रक्रिया में एक अभ्यर्थी को बोनस अंक देने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि उसने एक प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए काम किया था। प्रशासन का तर्क था कि ‘बोनस अंक नीति’ केवल सीधे सरकारी अनुबंध वाले कर्मचारियों पर लागू होती है। याचिकाकर्ता ने इस भेदभावपूर्ण नीति के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायालय का रुख और आदेश

मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस की बेंच ने शासन के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार रहीं:

सेवा का समान महत्व: कोर्ट ने कहा कि कोरोना संकट के समय दी गई हर सेवा महत्वपूर्ण थी। कर्मचारी किस माध्यम से नियुक्त था, इससे उसके सेवा भाव और योगदान की महत्ता कम नहीं होती।

समानता का अधिकार: निजी एजेंसी के माध्यम से काम करना किसी भी कर्मचारी को उसके कानूनी लाभों से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता।

60 दिनों में नियुक्ति का निर्देश: हाईकोर्ट ने शासन को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को नियमानुसार बोनस अंक दिए जाएं और यदि वह पात्र पाया जाता है, तो 60 दिनों के भीतर नियुक्ति आदेश जारी किया जाए।

भर्तियों पर प्रभाव

छत्तीसगढ़ सरकार की नीति के अनुसार, कोरोना काल में न्यूनतम 6 महीने तक सेवा देने वाले कर्मियों को भर्ती में 10 से 15 बोनस अंक दिए जाने का प्रावधान है। इस फैसले के बाद अब स्वास्थ्य विभाग को अपनी मेरिट लिस्ट (चयन सूचियों) में संशोधन करना होगा, जिससे प्रदेश के हजारों संविदा और आउटसोर्स कर्मियों के लिए सरकारी नौकरी की राह आसान हो जाएगी।

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