Latest News
भारत की थाली का सच: क्या भारत केवल शाकाहारी देश है? BRICS डिनर, राहुल गांधी का दावा और भारतीय खान-पान का इतिहास कैल्शियम स्कोर सही, तो भी दिल की बीमारी का खतरा? जानिए क्या कहती है 10 साल की यह नई रिसर्च कोरबा में आसमान में दिखा अद्भुत नजारा: अर्धचंद्र के ऊपर चमका बेहद खूबसूरत तारा, जानें क्या है इसका खगोलीय सच बालको मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ गणेशोत्सव से पहले कोरबा पुलिस का बड़ा एक्शन: एक ही दिन में 105 अपराधियों पर कार्रवाई, 60 वारंटी भेजे गए जेल अंबिकापुर में छात्र नेता की प्रताड़ना से तंग आकर छात्रा ने की आत्महत्या, आरोपी गिरफ्तार; कांग्रेस ने पार्टी से किया निलंबित
Home » कोरबा » कोरबा: छात्रावास में छात्राओं के ‘अजीब’ व्यवहार का सच आया सामने, भूत-प्रेत नहीं ‘एग्जाम स्ट्रेस’ है असली वजह

कोरबा: छात्रावास में छात्राओं के ‘अजीब’ व्यवहार का सच आया सामने, भूत-प्रेत नहीं ‘एग्जाम स्ट्रेस’ है असली वजह

Share:

कोरबा। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के पोड़ी स्थित 100 सीटर कन्या छात्रावास में पिछले कुछ दिनों से मचा हड़कंप अब शांत हो गया है। छात्राओं के असामान्य व्यवहार और अचानक झूमने की घटनाओं के बाद फैली ‘भूत-प्रेत’ की अफवाहों पर शिक्षा विभाग ने विराम लगा दिया है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह मामला किसी अंधविश्वास से नहीं, बल्कि परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव से जुड़ा है।

क्या था मामला?

बीते दिनों छात्रावास की लगभग एक दर्जन छात्राओं के व्यवहार में अचानक बदलाव देखा गया। छात्राएं एकाएक झूमने और अजीब हरकतें करने लगी थीं। डर के मारे ग्रामीण और अभिभावक इसे ऊपरी साया मानने लगे और आनन-फानन में पांच छात्राएं हॉस्टल छोड़कर घर लौट गईं।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) टीपी उपाध्याय और बीईओ एचआर दयाल ने छात्रावास का निरीक्षण किया। छात्राओं से विस्तृत चर्चा और काउंसलिंग के बाद विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि:

  • मास साइकोजेनिक इलनेस: वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव’ कहा जाता है, जहाँ डर या तनाव के कारण एक साथ कई लोग एक जैसा असामान्य व्यवहार करने लगते हैं।

  • परीक्षा का डर: आगामी परीक्षाओं को लेकर छात्राओं में काफी तनाव था।

  • शारीरिक कारण: नींद की कमी, घर से दूर रहने की भावनात्मक व्याकुलता और पढ़ाई के बोझ ने स्थिति को गंभीर बना दिया।

प्रशासन की पहल

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने छात्राओं और उनके परिजनों को समझाया कि भूत-प्रेत जैसी बातें पूरी तरह निराधार हैं। छात्राओं की काउंसलिंग की गई और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने के तरीके बताए गए। प्रशासन ने अब छात्रावास में नियमित स्वास्थ्य जांच और मनोवैज्ञानिक सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।


विशेषज्ञों की राय: परीक्षा के समय बच्चों को डराने के बजाय उनके साथ संवाद करना जरूरी है। मानसिक तनाव शारीरिक लक्षणों के रूप में प्रकट हो सकता है, जिसे प्यार और सही मार्गदर्शन से ठीक किया जा सकता है।

Leave a Comment

latest news