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छत्तीसगढ़: ‘आत्मसमर्पण नहीं, ससम्मान पुनर्वास’ – नक्सलियों के पत्र पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा का बड़ा संदेश

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रायपुर | 24 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों द्वारा जारी किए गए एक कथित पत्र का जवाब देते हुए एक महत्वपूर्ण ऑडियो संदेश जारी किया है। बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन के संदर्भ में आए इस संदेश में उपमुख्यमंत्री ने नक्सलियों को ‘मुख्यधारा’ में लौटने का न्योता देते हुए सरकार के मानवीय दृष्टिकोण को स्पष्ट किया।

 संदेश की मुख्य बातें: ‘ससम्मान वापसी’ पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा किसी को झुकाने की नहीं, बल्कि समाज से जोड़ने की है। संदेश के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • शब्द चयन पर स्पष्टता: शर्मा ने कहा कि वे “आत्मसमर्पण” शब्द के पक्षधर नहीं हैं। सरकार की कार्यप्रणाली का उद्देश्य केवल “ससम्मान पुनर्वास” और सामाजिक पुनर्स्थापन है।

  • जेल नहीं, सहायता केंद्र: उन्होंने इस डर को खारिज किया कि पुनर्वास केंद्र किसी “बंद जेल” की तरह होते हैं। उन्होंने इसे एक सहायक प्रक्रिया बताया जहाँ व्यक्ति को नए जीवन के लिए तैयार किया जाता है।

  • सुरक्षा की गारंटी: मुख्यधारा में लौटने वालों की जान के खतरे को देखते हुए, सरकार उन्हें तुरंत घर भेजने के बजाय एक व्यवस्थित और सुरक्षित माहौल में रखने की रणनीति अपनाती है।

  • दस्तावेज और पहचान: जंगलों में रहने के कारण जिन लोगों के पास पहचान पत्र या आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, सरकार प्राथमिकता के आधार पर उन्हें तैयार कराएगी।

स्किल डेवलपमेंट और भविष्य का रोडमैप

सरकार केवल वापसी ही नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य का विकल्प भी दे रही है:

  1. कौशल विकास: लौटने वाले युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण (Skill Development) दिया जाएगा।

  2. समिति का गठन: पुनर्वास नीति को प्रभावी बनाने के लिए एक विशेष उपसमिति का गठन किया गया है।

  3. जेल से पुनर्वास: उपमुख्यमंत्री ने एक बड़ी बात कहते हुए संकेत दिया कि यदि जंगल से वापसी संभव है, तो जेल में बंद व्यक्तियों के पुनर्वास की दिशा में भी सरकार विचार कर सकती है।

 विश्लेषकों का नजरिया: ‘सॉफ्ट अप्रोच’ का महत्व

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डिप्टी सीएम का यह ऑडियो संदेश छत्तीसगढ़ सरकार की “हार्ड पावर” के साथ “सॉफ्ट अप्रोच” के संतुलन को दर्शाता है। जहाँ एक तरफ सुरक्षा बल मुस्तैद हैं, वहीं दूसरी तरफ संवाद और सम्मान की भाषा के जरिए नक्सलियों के कैडर में विश्वास जगाने की कोशिश की जा रही है।

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