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सरगुजा की सियासत में ‘अपनों’ की सेंधमारी! भूपेश के दौरों ने बढ़ाई सिंहदेव खेमे की धड़कनें

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अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के बीच की ‘शीतयुद्ध’ (Cold War) अब जगजाहिर होने लगी है। सरगुजा के राजनीतिक गढ़ में बघेल की बढ़ती सक्रियता ने नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। पिछले 15 दिनों के भीतर भूपेश बघेल का दूसरा अंबिकापुर दौरा न केवल चर्चा का विषय बना, बल्कि सिंहदेव समर्थकों की दूरी ने खेमेबाजी की दरारों को और गहरा कर दिया है।

पारिवारिक आयोजन या राजनीतिक बिसात?

हाल ही में भूपेश बघेल, सरगांव नरेश विंदेश्वर शरण सिंहदेव (विंकी बाबा) के ‘सरगांव द पैलेस रिसोर्ट’ में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में शामिल हुए। बता दें कि विंकी बाबा, टीएस सिंहदेव के चचेरे भाई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विंकी बाबा आगामी विधानसभा चुनाव में भटगांव सीट से अपनी दावेदारी ठोक सकते हैं।

चूंकि टीएस सिंहदेव के उत्तराधिकारी के रूप में उनके पुत्र आदित्येश्वर शरण सिंहदेव (आदि बाबा) को देखा जाता है, ऐसे में भूपेश बघेल की विंकी बाबा से बढ़ती नजदीकियां सिंहदेव परिवार के भीतर ‘वर्चस्व की जंग’ का आधार तैयार कर सकती हैं।

विरोधियों का जमावड़ा और पुराने समीकरण

इस दौरे में भूपेश बघेल के साथ पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी मौजूद थे, जिन्हें सिंहदेव का मुखर विरोधी माना जाता है। वहीं, कथा के दौरान भाजपा सांसद चिंतामणि महाराज की मौजूदगी ने सबको चौंका दिया। कभी कांग्रेस का हिस्सा रहे चिंतामणि महाराज ने सिंहदेव से मतभेदों के चलते ही पार्टी छोड़ी थी। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद के बीच हुई अनौपचारिक चर्चा ने सरगुजा की राजनीति में ‘सुलह’ या ‘नए गठजोड़’ की अटकलों को हवा दे दी है।

मुख्य बिंदु:

नदारद रहे समर्थक: भूपेश बघेल के प्रवास के दौरान टीएस सिंहदेव के कट्टर समर्थक पूरी तरह गायब दिखे।

भटगांव सीट पर नजर: विंकी बाबा की राजनीतिक महात्वाकांक्षा भविष्य में सिंहदेव परिवार के लिए चुनौती बन सकती है।

हलचल तेज: बघेल के इन दौरों को सरगुजा संभाग में सिंहदेव के प्रभाव को कम करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

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