नई दिल्ली 26 जनवरी 2026| देश के 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली समारोह के बीच एक बड़े राजनीतिक विवाद ने जन्म ले लिया है। विवाद की जड़ कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी की सीटिंग अरेंजमेंट है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर प्रोटोकॉल के अपमान और ‘हीन भावना’ से काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।
विवाद का केंद्र: पहली नहीं, तीसरी पंक्ति
समारोह के दौरान राहुल गांधी को पहली पंक्ति के बजाय तीसरी पंक्ति में स्थान दिया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक तस्वीर साझा कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “क्या नेता प्रतिपक्ष के साथ ऐसा व्यवहार शालीनता और परंपरा के अनुरूप है? यह केवल मोदी सरकार की कुंठा और हीन भावना को दर्शाता है।”
दिग्गजों की नाराजगी: ‘शैडो पीएम’ का अपमान
कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले में मोर्चा खोल दिया है:
विवेक तन्खा (राज्यसभा सांसद): उन्होंने इसे प्रोटोकॉल और गरिमा की सरासर कमी करार दिया।
तारिक अनवर (सांसद): अनवर ने याद दिलाया कि नेता प्रतिपक्ष का एक विशिष्ट प्रोटोकॉल होता है और उन्हें ‘शैडो प्रधानमंत्री’ माना जाता है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय उत्सव पर उन्हें पीछे बैठाना दुखद है।
क्या कहता है ‘वॉरंट ऑफ प्रिसीडेंस’ (प्रोटोकॉल)?
सरकारी सूत्रों और अधिकारियों का इस पर अलग तर्क है। उनके अनुसार:
वरीयता सूची: सीटिंग व्यवस्था राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी ‘वॉरंट ऑफ प्रिसीडेंस’ के आधार पर तय होती है।
संवैधानिक पद: नेता प्रतिपक्ष का पद महत्वपूर्ण है, लेकिन सूची में वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और केंद्रीय मंत्रियों के बाद आते हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था: अधिकारियों का कहना है कि हर साल गणमान्य व्यक्तियों की संख्या और सुरक्षा कारणों से पंक्तियों के क्रम में मामूली बदलाव संभव है।
यह पहली बार नहीं है जब गणतंत्र दिवस पर बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ हो, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के पद पर राहुल गांधी की मौजूदगी ने इस बार इसे ‘अहंकार बनाम गरिमा’ की लड़ाई बना दिया है।








