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दिल को छू लेगा रक्षाबंधन पर प्रेमानंद जी महाराज का प्रवचन: बताया बहन के प्रति एक भाई का क्या कर्तव्य है?

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Premanand Ji Maharaj : रक्षाबंधन केवल एक सांस्कृतिक पर्व नहीं, अपितु धर्म, करुणा और जिम्मेदारी का पावन अवसर है. यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि भाई-बहन का रिश्ता केवल रक्त का नहीं, आत्मिक प्रेम, सेवा और समर्पण से जुड़ा होता है. परमार्थ संत श्री प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचनों में बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि रक्षाबंधन का पर्व केवल राखी बांधने की रस्म नहीं, बल्कि एक उच्च आत्मिक संकल्प और व्यवहार की शुद्धता का प्रतीक है.

रक्षाबंधन का त्योहार आज 9 अगस्त को मनाया जा रहा है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं.

भाई और बहन के प्यार भरे इस रिश्ते पर प्रेमानंद महाराज ने भी प्रवचन दिया है. उन्होंने बताया कि एक बहन के प्रति भाई का क्या कर्तव्य होना चाहिए.

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि चाहे बहन घर में हो या बाहर, भाई का व्यवहार बहन की छाया बनने जैसा होना चाहिए, जो हर संकट से पहले उसके सामने खड़ी हो.

उन्होंने यह भी कहा कि भाई का कर्तव्य केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है. बल्कि किशोर अवस्था में बहन को सही मार्ग दिखाना भी भाई की जिम्मेदारी है.

प्रेमानंद जी कहते हैं कि भाई को केवल बहन की रक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसके स्वाभिमान, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की रक्षा भी करनी चाहिए. रक्षा का वचन तभी सार्थक होता है जब उसमें सेवा और संवेदना जुड़ी हो

विवाह के बाद भी न टूटे रिश्ता

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि बहन की शादी के बाद भी भाई के स्नेह का अधिकार कभी खत्म नहीं होता है.

हर त्योहार, उत्सव और पारिवारिक अवसर पर भाई को चाहिए कि वह बहन से मिलने जाए, उसका हाल-चाल ले और उपहार देकर उसका मान बढ़ाए, स्नेह जताए.

उन्होंने बताया कि भाई चाहे कितना भी व्यस्त क्यों न हो, बहन के घर जाना, उसका हालचाल पूछना, उसकी खुशियों में शामिल होना, भाई का कर्तव्य है. यही तो वो स्नेह है जो भाई-बहन के रिश्ते को खास बनाता है.

बहन का आशीर्वाद, माता के आशीर्वाद से कम नहीं होता”
महाराज जी के अनुसार, बहन के मन से निकला आशीर्वाद शुद्ध, निष्कलंक और ईश्वरतुल्य होता है. भाई यदि सच्चे भाव से बहन की सेवा और आदर करे, तो उसके जीवन में ईश्वर स्वयं रक्षा करते हैं.

“रक्षा-सूत्र बांधते समय मन में हो ईश्वर का ध्यान”
राखी केवल धागा नहीं, एक ईश्वरीय ऊर्जा का सूत्र है. प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि राखी बांधते समय बहन को मन-ही-मन प्रभु से प्रार्थना करनी चाहिए –
“हे प्रभु! मेरे भाई का जीवन धर्ममय, सत्कर्ममय और प्रभुभक्ति से पूर्ण हो”

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