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हरदीबाजार CHC ढहाने से भड़का आक्रोश: BJP विधायक की अगुवाई में SECL GM दफ्तर पर तालाबंदी, वार्ता विफल

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कटघोरा के भाजपा विधायक प्रेमचंद पटेल को अपनी ही व्यवस्था और प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है

कोरबा / हरदीबाजार 19 सितंबर 2026: राज्य, जिला पंचायत और केंद्र में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के बावजूद कटघोरा के भाजपा विधायक प्रेमचंद पटेल को अपनी ही व्यवस्था और प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। शुक्रवार तड़के पुलिस बल की मौजूदगी में एसईसीएल (SECL) द्वारा हरदीबाजार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को बुलडोजर से जमींदोज किए जाने के बाद विधायक और स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।

शनिवार को विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में सराई सिंगार, रेंकी और आसपास के गांवों के सैकड़ों भू-विस्थापितों ने दीपका स्थित SECL महाप्रबंधक (GM) कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी और दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।

वोट बैंक खिसकने की आशंका और चुनावी रोष

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि विधायक का यह सख्त रुख न केवल जनहित से जुड़ा है, बल्कि आगामी चुनावों में होने वाले बड़े राजनीतिक नुकसान का परिणाम भी है। SECL की दीपका विस्तार परियोजना के तहत 18 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के कारण कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा पर बुलडोजर चलने और विस्थापितों की अनदेखी से जनता में गहरा आक्रोश है, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

विस्थापितों और विधायक की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने SECL प्रबंधन पर एकतरफा और तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:

  • 100% उचित मुआवजा: भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सभी परिवारों को नियमानुसार पूर्ण और न्यायसंगत मुआवजा मिले।

  • नौकरी और पुनर्वास: प्रभावित विस्थापितों को स्थायी नौकरी और सम्मानजनक नई बसाहट उपलब्ध कराई जाए।

  • वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था: ध्वस्त किए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के विकल्प के तौर पर तत्काल योग्य डॉक्टरों और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की जाए।

वार्ता विफल, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

धरने के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दीपका जीएम अशोक कुमार मौके पर पहुंचे और विधायक व ग्रामीणों से चर्चा की। हालांकि, ठोस और लिखित आश्वासन न मिलने के कारण वार्ता पूरी तरह विफल रही। विस्थापितों और विधायक ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक मांगों का लिखित समाधान नहीं होता, आंदोलन खत्म नहीं होगा। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

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