ग्वालियर (विशेष प्रतिनिधि) 22 सितंबर 2026 Gwalior Hungama : ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में अंदरखाने सुलग रही गुटबाज़ी का लावा सोमवार को बेला की बावड़ी में सरेआम फूट पड़ा। मौका था कुशवाहा समाज के छात्रावास सह-सामुदायिक भवन के भूमिपूजन का, लेकिन कार्यक्रम विकास की जगह भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही आपसी प्रतिद्वंदिता का अखाड़ा बन गया।

मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे ही मंच से संबोधित करने खड़े हुए, पंडाल की अग्रिम पंक्तियों में बैठे युवाओं ने अचानक नारेबाजी शुरू कर दी। “राजनीति नहीं चलेगी” और “समाज को बांटना बंद करो” के नारों से पूरा प्रांगण गूंज उठा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ युवकों के हाथों में काले झंडे भी लहरा रहे थे।
मंच के सामने चले लात-घूंसे, उड़ीं कुर्सियां
विरोध प्रदर्शन होते ही आयोजक और पुलिस तुरंत हरकत में आए और युवाओं को पंडाल से खींचकर बाहर करने लगे। इसी दौरान माहौल इतना गरमा गया कि दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प, मारपीट और लात-घूंसे चलने लगे। उग्र भीड़ ने एक-दूसरे पर कुर्सियां तक पटक दीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस युवाओं को कॉलर पकड़कर ले जाती दिख रही है, तो वहीं कुछ लोग पुलिस की कस्टडी में भी युवाओं पर हाथ साफ करने की कोशिश कर रहे हैं।
मंच से सिंधिया का सीधा हमला: ‘नाम और भेजने वाले का हिसाब नोट है’
हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संयम बनाए रखा और बेहद तल्ख तेवरों में मंच से कहा— “इन्हें अपना काम करने दो, हम अपना काम करेंगे।” उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए चेताया कि हंगामा करने वाले युवाओं और उन्हें पीछे से सह देकर भेजने वाले आकाओं के नाम नोट कर लिए गए हैं, जिसका हिसाब वक्त आने पर किया जाएगा।
अंदरूनी कलह का कारण: ‘सांसद को बुलावा नहीं, मंत्री जी बने सूत्रधार’
राजनीतिक हलकों में इस पूरे हंगामे की वजह भाजपा के ही दो बड़े नेताओं—सांसद भारत सिंह कुशवाहा और उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा—के बीच चल रही वर्चस्व की जंग को माना जा रहा है। इस बड़े सामाजिक कार्यक्रम के सूत्रधार मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा थे। आरोप है कि उन्होंने क्षेत्रीय सांसद भारत सिंह कुशवाहा को निमंत्रण पत्र तक में जगह नहीं दी, जिससे सांसद समर्थकों में भारी आक्रोश व्याप्त था।
पूर्व पार्षद भूपेंद्र कुशवाहा ने खुलकर समाज की मंशा सामने रखी और कहा कि समाज के वरिष्ठों की इच्छा थी कि गुटबाज़ी से ऊपर उठकर सभी पूर्व विधायकों, वर्तमान मंत्रियों और सांसद को एक मंच पर लाया जाना चाहिए था।
नारायण सिंह कुशवाहा ने जताया खेद, कहा- ‘समाज किसी की जागीर नहीं’
मामला बढ़ता देख सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर घटना पर गहरा दुख जताया। हालांकि, उन्होंने बिना नाम लिए अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर निशाना साधते हुए कहा— “कुछ युवा प्रभावशाली नेताओं के बहकावे में आकर भटक गए। कुशवाहा समाज किसी की बपौती या जागीर नहीं है। उच्च पदों पर बैठकर अपनी राजनीतिक शक्ति का गलत इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित है।”
फिलहाल इस घटना ने सिंधिया समर्थकों और मूल भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच की खाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है।







