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नहर किनारे नाप-जोख शुरू होते ही गरमाया माहौल: चौपाटी प्रोजेक्ट पर कोर्ट में मामला लंबित होने का दावा, प्रशासन बोला- ‘स्टे नहीं तो काम जारी रहेगा’
कोरबा 23 सितंबर 2026 Korba Chowpati Controversy : पावर हाउस रोड नहर पुल से राताखार की ओर जाने वाले बाईपास मार्ग (चर्चित दुबई रोड) पर नवनिर्मित मल्टीलेवल पार्किंग के पास चौपाटी सहित अन्य विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। हालांकि, जल संसाधन विभाग की सरकारी जमीन (खसरा नंबर 24, कुल रकबा 5.52 एकड़) पर शुरू हुई सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय व्यापारियों का आक्रोश और अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला।

बुधवार को जैसे ही नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम ने स्थल पर पहुंचकर नाप-जोख (टेप निकालकर) शुरू की, क्षेत्र के प्रभावित व्यापारी एकजुट हो गए और कार्यवाही पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
परियोजना की प्रमुख बातें और योजना का खाका
नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा नहर पुल के समीप स्थित जल संसाधन विभाग की भूमि पर निम्नलिखित विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं:
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मल्टी लेवल कार पार्किंग: यातायात को सुव्यवस्थित करने के लिए।
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चौपाटी व फुट मार्केट: शहर के सौंदर्गीकरण और खान-पान/खरीदारी क्षेत्र के रूप में विकसित करने हेतु।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी परिसर: परिसर का सौंदर्गीकरण व निर्माण कार्य।
राजस्व कार्यवाही, व्यापारियों का विरोध और कोर्ट का हवाला
सीमांकन की सूचना के तहत प्रभावित 22 व्यापारियों को अपने-अपने दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। नाप-जोख शुरू होते ही व्यापारियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि निर्माण कार्य से उनका बरसों पुराना व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो जाएगा।
| प्रमुख विषय | व्यापारियों व प्रशासन का पक्ष |
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| व्यापारिक नुकसान | दुकानों के ठीक सामने चौपाटी बनने से ग्राहकों की आवाजाही रुकेगी और व्यापार ठप्प हो जाएगा। |
| न्यायालयीन मामला | व्यापारियों ने बताया कि इस क्षेत्र के सीमांकन का मामला न्यायालय में भी लंबित है। |
| प्रशासन का रुख | नायब तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सीमांकन की कार्यवाही पर न्यायालय से कोई स्टे (रोक) नहीं है, इसलिए राजस्व प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। |
चेम्बर ऑफ कॉमर्स का हस्तक्षेप और विकल्प के सुझाव
व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने प्रदेश के मंत्री लखन लाल देवांगन, महापौर संजू देवी राजपूत, कलेक्टर कुणाल दुदावत और निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, अब तक व्यापारियों को कोई ठोस राहत मिलती नहीं दिख रही है।
“हम विकास और शहर के सौंदर्गीकरण के विरोधी नहीं हैं। हमारी मांग केवल इतनी है कि चौपाटी के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तय किया जाए, ताकि स्थापित व्यवसाय प्रभावित न हों।”
— व्यापारी एवं चेम्बर प्रतिनिधि
दुकानों के सामने चौपाटी बनने से आशंकाएं
व्यापारिक संघ द्वारा प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित चिंताएं जताई गई हैं:
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मार्ग अवरुद्ध होना: दुकानों के सामने चौपाटी बनने से ग्राहकों की सीधी पहुंच प्रभावित होगी।
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यातायात व पार्किंग का दबाव: क्षेत्र में अत्यधिक भीड़भाड़ से यातायात व्यवस्था बिगड़ेगी।
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सफाई व कचरा प्रबंधन: चौपाटी से उत्पन्न कचरे और गंदगी के उचित निस्तारण में समस्या होगी।
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आजीविका पर संकट: वर्षों से जमी-जमाई दुकानों के बंद या कमजोर होने का खतरा।
व्यापारियों ने प्रशासन से अपील की है कि शहर के सौंदर्गीकरण के साथ-साथ स्थानीय दुकानदारों के हित और सुव्यवस्थित यातायात को ध्यान में रखकर चौपाटी निर्माण के लिए स्थल परिवर्तन (अल्टरनेट लोकेशन) पर सकारात्मक फैसला लिया जाए।







