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छत्तीसगढ़/धमतरी: धर्मांतरण विवाद के बीच 117 साल पुराने ऐतिहासिक चर्च में एंट्री बोर्ड, 1500 आवेदनों पर फंसा पेंच

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अंतिम संस्कार और प्रार्थना सभाओं को लेकर पहले भी हुआ विवाद

रायपुर 23 सितंबर 2026 Dhamtari Church Dispute :  छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में चर्चों और प्रार्थना सभाओं को लेकर बढ़ते विवादों व धर्मांतरण के आरोपों के बीच क्रिश्चियन फोरम ने एक बड़ा कदम उठाया है। सुरक्षा के लिहाज से जिले के लगभग 40 चर्चों और प्रार्थना स्थलों के बाहर विशेष सूचना बोर्ड लगाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार इन प्रमुख स्थलों में 117 साल पुराना ऐतिहासिक ‘मेनोनाइट संडेज़ चर्च’ भी शामिल है। बोर्ड पर स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है: “नियमानुसार चर्च भवन आराधना हेतु प्रत्येक ईसाईयों के लिए है।”

सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम और फोरम का दावा

क्रिश्चियन फोरम के अधिकारियों के अनुसार, बाहरी लोगों के प्रवेश के कारण हाल के दिनों में कई विवाद खड़े हुए हैं। असामाजिक तत्वों की घुसपैठ रोकने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह बोर्ड लगाए गए हैं।

  • 1,500 घोषणा पत्र का दावा: फोरम के जनरल सेक्रेटरी डॉ. डायमंड फिलिप्स ने दावा किया कि पिछले एक महीने के भीतर 1,500 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से प्रार्थना सभाओं में शामिल होने और धर्म परिवर्तन से जुड़े घोषणा पत्र जिला प्रशासन को सौंपे हैं।

  • 300 से अधिक आवेदन लंबित: डॉ. फिलिप्स का यह भी कहना है कि पिछले डेढ़ साल में 300 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से धर्मांतरण के लिए प्रशासन के पास आवेदन किए हैं, जो फिलहाल प्रक्रियाधीन (लंबित) हैं।

  • कोई दबाव नहीं: फोरम ने स्पष्ट किया कि किसी पर भी प्रार्थना सभा में आने या धर्म परिवर्तन करने का कोई दबाव नहीं डाला जाता।

प्रशासनिक रुख और असमंजस

जिला प्रशासन ने क्रिश्चियन फोरम द्वारा प्रस्तुत किए गए 1,500 आवेदनों के आंकड़े की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

  • कलेक्ट्रेट के आवक-जावक शाखा प्रभारी व अधीक्षक टीआर ध्रुव ने कहा कि प्रार्थना सभा से जुड़े आवेदनों का कोई अलग से रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।

  • जिला पंचायत सीईओ जयंत नहाटा ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आवेदनों की जानकारी फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पूरे मामले की जांच और आवेदनों का परीक्षण कराकर नियमानुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।

अंतिम संस्कार और प्रार्थना सभाओं को लेकर पहले भी हुआ विवाद

धमतरी जिले के बनरौद-कुरूद और मुजगहन जैसे क्षेत्रों में पहले भी धर्मांतरण और अंतिम संस्कार के स्थलों को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखे विरोध देखने को मिले हैं। कई मामलों में धर्मांतरित व्यक्तियों के निधन के बाद परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए 5 से 8 घंटे तक प्रशासनिक और सामाजिक सहमति का इंतजार करना पड़ा था।

बढ़ते तनाव और लगातार बन रही संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने करीब एक सप्ताह पूर्व शांति समिति की बैठक भी आयोजित की थी।

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