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डूसू चुनाव: बस कंडक्टर के बेटे ने निर्दलीय लड़कर रचा इतिहास, तोड़ा दशकों पुराना सियासी तिलस्म

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नई दिल्ली 19 सितंबर 2026  Dusu record break: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में इस बार एक ऐसा चुनावी उलटफेर देखने को मिला है जिसने एबीवीपी (ABVP) और एनएसयूआई (NSUI) जैसी दिग्गज छात्र राजनीति की बुनियाद हिला दी। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे दीपांशु शौकीन ने भारी मतों से ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल कर छात्र राजनीति के सारे पुराने समीकरण बदल डाले हैं।

उनकी यह जीत इस बात का साफ संदेश है कि DU के छात्र अब पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के बंधनों से ऊपर उठकर काम करने वाले और अपने बीच के लोकप्रिय चेहरों पर भरोसा जता रहे हैं।

संघर्ष से सफलता तक: जानिए कौन हैं दीपांशु शौकीन

  • साधारण पृष्ठभूमि: बाहरी दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले दीपांशु एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता दिल्ली में बस कंडक्टर हैं और मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं।

  • शिक्षा: शहीद भगत सिंह कॉलेज से स्नातक करने के बाद दीपांशु वर्तमान में डीयू के ‘डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज’ के छात्र हैं।

  • IAS के बजाय चुना राजनीति का रास्ता: परिवार की इच्छा थी कि दीपांशु UPSC की तैयारी कर IAS अधिकारी बनें, लेकिन उन्होंने छात्र सेवा और राजनीति को ही अपना लक्ष्य चुना।

टिकट कटने पर बगावत, NSUI और ABVP दोनों को पछाड़ा

दीपांशु पहले NSUI से जुड़े हुए थे और उन्होंने संगठन से उपाध्यक्ष पद के लिए टिकट मांगा था। शुरुआत में नामांकन भी हुआ, लेकिन बाद में पार्टी ने नाम वापस लेने का दबाव बनाया। दीपांशु ने अपनी साख और छात्रों के समर्थन के बल पर पीछे हटने से इनकार कर दिया और बगावत कर बतौर निर्दलीय मैदान में उतर गए।

दिलचस्प बात यह भी है कि ABVP के अध्यक्ष पद प्रत्याशी यश डबास और दीपांशु शौकीन बेहद अच्छे दोस्त हैं, जो यह दर्शाता है कि उनकी स्वीकार्यता और लोकप्रियता किसी पार्टी या विचारधारा की सीमाओं में बंधी नहीं है।

छात्रों के न्याय के लिए ‘नंगे पैर’ प्रचार और सत्याग्रह

दीपांशु के चुनाव प्रचार का तरीका सबसे अनोखा रहा। उन्होंने पूरे चुनाव के दौरान नंगे पैर घूमकर प्रचार किया।

“सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद मैंने नंगे पैर चलने का संकल्प लिया। पैरों में होने वाला दर्द मुझे उन पीड़ित छात्रों के संघर्ष और परेशानियों की लगातार याद दिलाता है जिनकी आवाज मैं उठाना चाहता हूं। जब तक पीड़ित छात्रों को पूरा न्याय नहीं मिल जाता, मेरा यह सत्याग्रह जारी रहेगा।” — दीपांशु शौकीन

छात्र राजनीति में नया दौर

दीपांशु शौकीन की यह अभूतपूर्व जीत भविष्य में डीयू समेत देश के अन्य विश्वविद्यालयों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए उम्मीद का नया रास्ता खोलेगी।

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