उज्जैन 9 सितंबर Khade Hanuman Ji : धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत चलाए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सड़क चौड़ीकरण अभियान के बीच एक बेहद अनोखा और आध्यात्मिक-तकनीकी मामला सामने आया है। कंठाल चौराहा से छत्री चौक के बीच मार्ग चौड़ा करने की प्रक्रिया के दौरान अति प्राचीन ‘खड़े हनुमान मंदिर’ के गर्भगृह और बाहरी ढांचे को तो हटा दिया गया, लेकिन मुख्य प्रतिमा को विस्थापित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारी-भरकम JCB मशीनों, अत्याधुनिक उपकरणों और लगभग 40 घंटे के लगातार प्रयासों के बावजूद हनुमान जी की यह दुर्लभ प्रतिमा अपने स्थान से 1 इंच भी नहीं हिली है।

लगातार असफलता और जनआक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल जबरन विस्थापन की प्रक्रिया रोक दी है। प्रतिमा को सम्मानपूर्वक ‘कैनोपी टेंट’ से ढककर सुरक्षित किया गया है और अब आगे की रणनीति के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) तथा मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग की तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को शामिल करने का फैसला किया गया है।
चमत्कार बनाम प्राचीन इंजीनियरिंग: क्यों नहीं हिल रही प्रतिमा?
इस घटना ने एक तरफ जहां लाखों श्रद्धालुओं और साधु-संतों की धार्मिक आस्था को गहरा किया है, वहीं दूसरी तरफ पुरातत्वविदों के लिए यह प्राचीन भारतीय निर्माण कला का उत्कृष्ट नमूना बन गई है।
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धार्मिक मान्यता और संतों का पक्ष: मंदिर के पुजारी महेश पंडित (बैरागी) और स्थानीय साधु-संतों का कहना है कि मशीनों के फेल होने के पीछे बजरंगबली का स्पष्ट संकेत है कि वे अपना स्थान छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते। श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रतिमा का न हिलना किसी दिव्य चमत्कार से कम नहीं है। स्थानीय नागरिकों ने मंदिर स्थल पर चेतावनी बोर्ड भी लगा दिए हैं कि यदि प्रतिमा को कोई नुकसान पहुंचता है तो इसकी पूरी जवाबदेही प्रशासन की होगी।
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पुरातत्वविद की राय: विक्रम विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र के विशेष बेसाल्ट (Basalt) पत्थर से निर्मित है, जिसकी शैली परमार कालीन एवं राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला से मेल खाती है। डॉ. सोलंकी का कहना है कि उस दौर में मूर्तियों को आधारशिला (Foundation) में स्थापित करने के लिए ‘इंटरलॉकिंग’, ‘पिन लॉकिंग’ और विशेष पत्थरों के छेदों में दबाव देकर फिट करने की वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग होता था। इसी बेजोड़ लॉकिंग सिस्टम के कारण आधुनिक ताकतवर मशीनें भी इसे उखाड़ पाने में असमर्थ साबित हो रही हैं।
अब 3D स्कैनिंग रिपोर्ट से खुलेगा राज
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि प्रतिमा के आधार की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उसके निचले हिस्से में करीब डेढ़ फीट तक सावधानीपूर्वक खुदाई की गई है।
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अत्याधुनिक स्कैनिंग: अब ASI और पुरातत्व विभाग की संयुक्त टीम ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) और 3D स्कैनिंग तकनीकों के माध्यम से प्रतिमा के आधार, मिट्टी के घनत्व और अंदरूनी लॉकिंग सिस्टम की मैपिंग करेगी।
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सुरक्षित विस्थापन की योजना: यदि स्कैनिंग रिपोर्ट में सुरक्षित विस्थापन संभव पाया गया, तो प्रतिमा को टंकी चौक पर पूरी भव्यता के साथ पुनर्स्थापित करने की योजना है।
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स्थान पर पुनर्निर्माण की मांग: दूसरी ओर, संत समाज की मांग है कि सड़क के नक्शे में थोड़ा संशोधन करके हनुमान जी के मंदिर को इसी स्थान पर नए स्वरूप में निर्मित किया जाए।
सिंहस्थ-2028 के इस महाआयोजन से पहले ऐतिहासिक धरोहर, जनआस्था और प्रशासनिक विकास के इस त्रिकोण ने पूरे मालवा अंचल का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फिलहाल सभी की निगाहें आने वाली स्कैनिंग रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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