नई दिल्ली / काठमांडू 2 सितंबर Nepal Flash Flood : नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आए भीषण हिमालयन फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) के बाद अब जो तस्वीर सामने आ रही है, वह दिल दहला देने वाली है। पानी उतरने के साथ ही पूरे इलाके में मलबे और कीचड़ की परत जम गई है, जिसके नीचे से लगातार सड़ी-गली लाशें बरामद हो रही हैं। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि नेपाल में एक बार फिर वैश्विक महामारी कोरोना काल (COVID-19) जैसा भयावह दृश्य दिखने लगा है।

मुर्दाघरों में जगह खत्म, सेना पीपीई किट पहनकर गोरकर्ण के जंगलों में दफना रही शव
नेपाल के अस्पतालों और मुर्दाघरों (Mortuaries) की क्षमता जवाब दे चुकी है। पूरे देश में लगभग 350 शवों को ही सुरक्षित रखने की व्यवस्था है, जबकि बरामद लाशों की संख्या 1,000 के पार पहुंच चुकी है।
इस मानवीय संकट से निपटने के लिए नेपाली सुरक्षा बलों और सेना के जवानों को मैदान में उतारा गया है। जवान संक्रमण से बचने के लिए पीपीई किट पहनकर सड़कों, जंगलों और पहाड़ी ढलानों से बॉडी बैग्स में शवों को एकत्र कर रहे हैं। काठमांडू के बाहरी इलाके में स्थित गोरकर्ण वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामूहिक अंतिम संस्कार और शवों को दफनाने का काम जारी है। भविष्य में परिजनों द्वारा पहचान के लिए हर शव का डीएनए (DNA) सैंपल सुरक्षित रखा जा रहा है और बॉडी बैग्स पर विशेष पहचान टैग लगाए जा रहे हैं।
1,050 से अधिक मौतों की पुष्टि, 4,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता
ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस त्रासदी में अब तक 1,050 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। आधिकारिक तौर पर 4,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। हालांकि, नेपाली सेना ने अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए अब तक 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है।
चितवन, रसुवा और नुवाकोट बने तबाही के केंद्र
बाढ़ का सबसे घातक प्रभाव रसुवा और नुवाकोट जिलों में देखने को मिला, जहां ताश के पत्तों की तरह घर जमींदोज हो गए। निचले इलाके में स्थित चितवन जिले में बाढ़ के तेज बहाव के साथ बहकर आए सबसे ज्यादा 321 शव बरामद हुए हैं।
महामारी का खतरा: सरकार ने 1955 के पुलिस कानून में किया संशोधन
भीषण गर्मी और नमी के बीच कीचड़ में सड़ रही लाशों के कारण व्यापक महामारी (Epidemic) फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने आपातकालीन मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई और नेपाल पुलिस अधिनियम 1955 की धारा 22 (क) में तत्काल प्रभाव से संशोधन किया है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य बिना किसी कानूनी देरी के अज्ञात शवों का त्वरित प्रबंधन और अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना है, ताकि संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।








