Latest News
भारत की थाली का सच: क्या भारत केवल शाकाहारी देश है? BRICS डिनर, राहुल गांधी का दावा और भारतीय खान-पान का इतिहास कैल्शियम स्कोर सही, तो भी दिल की बीमारी का खतरा? जानिए क्या कहती है 10 साल की यह नई रिसर्च कोरबा में आसमान में दिखा अद्भुत नजारा: अर्धचंद्र के ऊपर चमका बेहद खूबसूरत तारा, जानें क्या है इसका खगोलीय सच बालको मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ गणेशोत्सव से पहले कोरबा पुलिस का बड़ा एक्शन: एक ही दिन में 105 अपराधियों पर कार्रवाई, 60 वारंटी भेजे गए जेल अंबिकापुर में छात्र नेता की प्रताड़ना से तंग आकर छात्रा ने की आत्महत्या, आरोपी गिरफ्तार; कांग्रेस ने पार्टी से किया निलंबित
Home » कोरबा » छत्तीसगढ़ में गहरा सकता है बिजली संकट: कोरबा के 840 MW दर्री पावर प्लांट में बचा सिर्फ 10 दिन का कोयला, रोजाना 6 हजार टन की किल्लत

छत्तीसगढ़ में गहरा सकता है बिजली संकट: कोरबा के 840 MW दर्री पावर प्लांट में बचा सिर्फ 10 दिन का कोयला, रोजाना 6 हजार टन की किल्लत

Share:

कोरबा 2 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दर्री स्थित 840 मेगावाट (MW) क्षमता वाले सरकारी पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक घटकर महज 10 दिन का रह गया है। स्थिति यह है कि प्लांट को रोजाना करीब 18 हजार टन कोयले की जरूरत है, जबकि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) से रोजाना औसतन 12 हजार टन कोयले की ही आपूर्ति हो पा रही है। हर दिन 6 हजार टन के इस भारी अंतर के कारण पावर प्लांट के संचालन और राज्य की बिजली आपूर्ति पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

रोजाना 6 हजार टन का गैप, बारिश या प्रबंधन की नाकामी?

प्लांट में कोयले की सप्लाई प्रभावित होने का मुख्य कारण बारिश से खदानों में कामकाज और परिवहन बाधित होना बताया जा रहा है। हालांकि, इस स्थिति ने प्रबंधन की दूरदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मानसून के मौसम की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते पर्याप्त बफर स्टॉक क्यों नहीं बनाया गया? क्या राज्य की बिजली आपूर्ति को पूरी तरह मौसम के भरोसे छोड़ दिया गया है?

बाहर से महंगी बिजली खरीदने की आ सकती है नौबत

यदि आने वाले दिनों में कोयले की आवक में सुधार नहीं हुआ, तो प्लांट में बिजली उत्पादन घटाना पड़ सकता है। राज्य में बिजली की मांग पूरी करने के लिए सरकार को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी, जिससे पावर कंपनी पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा और अंततः इसका असर राज्य के खजाने पर दिखेगा।

कमीशनखोरी और निजीकरण की साजिश की भी चर्चाएं तेज

इस पूरे मामले को लेकर अंदरखाने कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि सप्लाई चेन की नाकामी और कथित कमीशन के फेर में उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। वहीं, बिजली विशेषज्ञों और आम जनता के बीच यह आशंका भी जताई जा रही है कि क्या सरकारी बिजली कंपनी को वित्तीय घाटे और अव्यवस्था में धकेलकर निजीकरण का रास्ता तो तैयार नहीं किया जा रहा? हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अधिकारियों की सफाई: ‘मौसम साफ होते ही सुधरेगी सप्लाई’

मामले पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता और ईंधन प्रभारी एन. भुनेश्वर राव ने बताया कि दर्री प्लांट में फिलहाल 10 दिन का कोयला स्टॉक मौजूद है। बारिश के कारण एसईसीएल से सप्लाई थोड़ी प्रभावित हुई है, लेकिन मौसम साफ होते ही आपूर्ति सामान्य कर ली जाएगी।

अब देखना यह होगा कि कंपनी प्रबंधन मौसम के भरोसे रहने के बजाय समय रहते सप्लाई चेन सुधार पाता है या छत्तीसगढ़ के लोगों को बिजली संकट और महंगी बिजली का सामना करना पड़ेगा।

Leave a Comment

latest news