रायपुर 14 अगस्त| शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं और डॉक्टरों की त्वरित पहल ने एक बार फिर एक मासूम की जिंदगी में खुशियों के सुर घोल दिए हैं। राजनांदगांव जिले के डेढ़ वर्षीय बालक मयंक की खोई हुई सुनने की क्षमता ‘राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (RBSK) और ‘मुख्यमंत्री चिरायु योजना’ के प्रभावी समन्वय से पूरी तरह लौट आई है।

जांच से लेकर सर्जरी तक का त्वरित सफर

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त्वरित पहचान: RBSK टीम ने मयंक का परीक्षण कर उसमें हियरिंग लॉस की पहचान की।
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निःशुल्क रिफरल: बिना समय गंवाए कागजी प्रक्रिया पूरी की गई और मयंक को देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान AIIMS रिफर किया गया।
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सफल ऑपरेशन: AIIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में बच्चे का कोक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
आंखों में छलके खुशी के आंसू ऑपरेशन के बाद जब पहली बार कोक्लियर इम्प्लांट डिवाइस को एक्टिवेट किया गया, तो मयंक ने अपने जीवन में पहली बार माता-पिता की आवाज सुनी। बच्चे के चेहरे पर आई चमक और प्रतिक्रिया को देखकर माता-पिता के सब्र का बांध टूट गया और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
पुनर्वास और थेरेपी जारी अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मयंक को आगे की रिकवरी के लिए क्षेत्रीय पुनर्वास केंद्र (CRC) भेजा गया है। वहां विशेषज्ञ उसे स्पीच और हियरिंग थेरेपी दे रहे हैं ताकि वह आवाजों को बेहतर ढंग से समझ सके और सामान्य बच्चों की तरह बोलना सीख सके।
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