मुख्य बिंदु
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स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन की मांग: कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वे 15 अगस्त को लाल किले से देश के युवाओं को संबोधित करें।
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प्रमुख मुद्दे: दीपके ने मांग की है कि पीएम मोदी देश को स्पष्ट रूप से बताएं कि सरकार शिक्षा, बेरोजगारी और बढ़ते महंगाई के संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठा रही है।
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ऑनलाइन याचिका की शुरुआत: नागरिकों और युवाओं से इस मांग का समर्थन करने की अपील करते हुए एक डिजिटल पिटीशन और उसका लिंक सोशल मीडिया पर साझा किया गया है।
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आरएसएस प्रमुख की सलाह का जिक्र: बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को मोहन भागवत की उस नसीहत को मानना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था कि विरोध प्रदर्शन करने वाले ‘जेन-जी’ युवाओं को राष्ट्रविरोधी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
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नीट धांधली और युवाओं का गुस्सा: नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश देखा गया है, जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
नई दिल्ली 8 अगस्त : स्वतंत्रता दिवस के नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक बड़ी और अहम मांग रखी है। उन्होंने पीएम मोदी से गुजारिश की है कि आगामी 15 अगस्त को लाल किले से देश के नाम अपने संबोधन में वे विशेष तौर पर देश के युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर बात करें।
सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग
अभिजीत दीपके का कहना है कि प्रधानमंत्री को देश के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि मौजूदा सरकार देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगी होती शिक्षा और आम आदमी के जीवन यापन के बढ़ते खर्च (महंगाई) को नियंत्रित करने के लिए क्या योजनाएं बना रही है और क्या कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है, और ऐसे में देश के मुखिया से सीधे संवाद की उम्मीद करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
ऑनलाइन याचिका के जरिए समर्थन की अपील
अपनी इस मांग को जन आंदोलन का रूप देने के लिए दीपके ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट के जरिए देश के नागरिकों और युवाओं से एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने संदेश जारी कर कहा कि यदि देश की जनता यह मानती है कि सरकार को शिक्षा, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों पर जवाबदेही तय करनी चाहिए, तो वे आगे आएं और ऑनलाइन याचिका पर अपनी सहमति व हस्ताक्षर दर्ज कराएं। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक डिजिटल लिंक भी साझा किया है।
बीजेपी और आरएसएस के वैचारिक तालमेल पर सवाल
अपने बयान में दीपके ने केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सलाह दी कि बीजेपी को अपने वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के बयानों और सीख से सबक लेना चाहिए।
उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में आरएसएस प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि विरोध-प्रदर्शन करने वाले ‘जेन-जी’ (Gen-Z) पीढ़ी के युवाओं को राष्ट्रविरोधी या देशद्रोही नहीं ठहराया जाना चाहिए। दीपके ने यह दावा भी किया कि मौजूदा समय में सत्ता में बैठे लोगों और संघ प्रमुख के बयानों के बीच वैचारिक तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है, क्योंकि बीजेपी नेताओं द्वारा संघ प्रमुख की नसीहतों को अक्सर अनसुना कर दिया जाता है।
नीट परीक्षा विवाद और छात्रों का आक्रोश
मुंबई में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा युवाओं के साथ किए गए संवाद के ठीक अगले दिन पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार को संघ प्रमुख के उस रुख का पूरी तरह स्वागत करना चाहिए, जिसमें उन्होंने नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधलियों और गड़बड़ियों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों को पूरी तरह जायज बताया था।
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक कांड के बाद पूरे देश के छात्रों में भारी गुस्सा देखने को मिला था। इस बड़े विवाद और प्रशासनिक विफलता के कारण बीते महीने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जिससे यह मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
‘विरोध करने से कोई युवा देशद्रोही नहीं बनता’
हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ‘जेन-जी’ (1997 से 2012 के बीच जन्मे) युवाओं का खुलकर समर्थन किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि छात्रों की शिकायतें और चिंताएं पूरी तरह तर्कसंगत हैं और उन्हें देश के युवाओं की नीयत पर पूरा भरोसा है। भागवत के अनुसार, अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय के लिए आवाज उठाना किसी भी नागरिक को एंटी-नेशनल या देशद्रोही नहीं बनाता। राजनीति के जानकारों का मानना है कि ‘जेन-जी’ और ‘जेन अल्फा’ (2013 से 2025 के बीच जन्मे) पीढ़ी तक संघ की इस पहुंच के गहरे राजनीतिक मायने हैं।
युवाओं के आक्रोश को नजरअंदाज करना लोकतंत्र के हित में नहीं
अपनी बात को समाप्त करते हुए अभिजीत दीपके ने जोर देकर कहा कि देश के नौजवानों के भीतर सुलग रहे आक्रोश और उनकी न्यायसंगत मांगों को लंबे समय तक अनदेखा करना कतई उचित नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र के स्वास्थ्य के हित में नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस स्वतंत्रता दिवस पर देश के युवाओं को निराश नहीं करेंगे और शिक्षा, रोजगार व भविष्य के संकट से निपटने के लिए ठोस घोषणाएं करेंगे।









