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बदलाव की आहट या राजनीतिक मजबूरीः क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से थम जाएगा देश का युवा आक्रोश?

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मुख्य हाइलाइट्स:

  • इस्तीफे का प्रस्ताव: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे स्वीकार किया जाना अभी शेष है।

  • सीजेपी का बड़ा दावा: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर लगभग एक महीने से चल रहे धरने और दबाव के बाद यह कदम उठाया गया है।

  • सोनम वांगचुक का अनशन और पुलिस कार्रवाई: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया था।

  • विपक्ष का तीखा हमला: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया।

नई दिल्ली 25 जुलाई : देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली, विशेषकर नीट-यूजी (NEET-UG) प्रश्नपत्र लीक मामले ने आखिरकार केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बड़े फेरबदल की पटकथा लिख दी है। चौतरफा दबाव और महीनों से सुलग रहे गुस्से के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से घोषणा की है कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।

शिक्षा मंत्री का बयान और कारण:

अपने त्यागपत्र के पीछे का कारण स्पष्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बनी स्थिति का राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठाएं। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता सुरक्षित रहे तथा विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी कानूनी पेचीदगी में न उलझकर उनके करियर निर्माण पर केंद्रित रहे, इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है।

जंतर-मंतर पर सीजेपी का ऐतिहासिक आंदोलन:

नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू किया था। इस आंदोलन को धार देने के लिए लद्दाख के जाने-माने शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे थे।

इस आंदोलन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। इसके बावजूद 20 जुलाई को संसद सत्र के पहले दिन जब छात्रों ने संसद मार्च करने की कोशिश की, तो पुलिस ने भारी लाठीचार्ज किया। इस दमनकारी कार्रवाई के वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तो यह आंदोलन देश के युवाओं की नाराजगी का मुख्य केंद्र बन गया।

विपक्ष का आक्रामक रुख और राहुल गांधी का तंज:

संसद के अंदर और बाहर विपक्षी दलों ने सरकार को पूरी तरह घेर लिया था। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा तंज कसा। ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा:

“मेट्रो बंद करो। रास्ते बंद करो। दुकानें बंद करो। इंटरनेट बंद करो। खाना बंद करो। अपना हक मांग रहे छात्रों के खिलाफ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए… बस एक चीज बंद नहीं कर पाए, मोदी जी- पेपर लीक।”

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाओं को बाधित करने पर भी विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया था। पुलिस कार्रवाई के विरोध में राहुल गांधी समेत कई दिग्गज नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर भी धरने पर बैठ गए थे।

बुद्धिजीवियों और लेखकों का समर्थन:

इस पूरे आंदोलन को केवल राजनीतिक दलों का ही नहीं, बल्कि देश भर के प्रबुद्ध वर्ग का भी समर्थन मिला। देश के 100 प्रमुख लेखकों, कलाकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे छात्रों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया था। उनका साफ कहना था कि बार-बार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाएं देश की शिक्षा व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की साख पर एक बड़ा बट्टा लगा रही हैं।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकों (जिनमें जेपी नड्डा सहित केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल थे) के बाद आखिरकार राजनीतिक और सामाजिक दबाव इतना बढ़ गया कि शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना पड़ा। हालांकि इस्तीफा स्वीकार होना अभी बाकी है, लेकिन इस घटनाक्रम ने देश की युवा राजनीति और परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार की बहस को एक नए मोड़ पर ला खड़ा कर दिया है।

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