क्या है पूरा माजरा? (30 सेकेंड में पूरी कहानी)
नई दिल्ली 22 जुलाई : शिक्षा और परीक्षा प्रणाली की सलामती के लिए 28 जून से ‘कॉक्रोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को अनशन के 20वें दिन (18 जुलाई) जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
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अब पेंच यह फंसा है कि सोनम वांगचुक बाहर निकलना चाहते हैं, पर पुलिस जाने नहीं दे रही। इसी ‘जबरन भर्ती’ पर AIIMS और सफदरजंग के रेजीडेंट डॉक्टर्स (RDA) का पारा हाई हो गया है। डॉक्टरों ने सीधे देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखकर सवाल दाग दिया है: “अस्पताल इलाज के लिए होते हैं, इंसानों को नज़रबंद करने की जेल नहीं!”
डॉक्टरों के 3 तीखे सवाल, जिसने प्रशासन की नींद उड़ाई:
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1. LAMA का हक़ कहाँ गया?
मेडिकल की दुनिया में कानून है – LAMA (Leave Against Medical Advice). अगर मरीज अपनी मर्जी से डिस्चार्ज होना चाहता है, तो उसे रोका नहीं जा सकता। डॉक्टरों ने पूछा—बिना किसी कोर्ट ऑर्डर के वांगचुक को जबरन वार्ड में कैसे बांध रखा है?
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2. इलाज का वार्ड बना छावनी!
अस्पताल के अंदर पुलिस की भारी तैनाती से बाकी मरीजों, उनके तीमारदारों और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों की सांसें फूल रही हैं।
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3. डॉक्टरी का ‘राजनीतिक टूल’ के रूप में इस्तेमाल बंद हो!
डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि मेडिकल साइंस को राजनीतिक मोहरा न बनाया जाए।
सोनम वांगचुक की सेहत का ‘हेल्थ मीटर’:
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शरीर का हाल: 20+ दिनों के अनशन की वजह से ब्लड शुगर, पोटैशियम और ल्यूकोसाइट्स के स्तर में भारी गिरावट आई है।
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वांगचुक का स्टैंड: निर्जलीकरण (Dehydration) से बचने के लिए वे ORS और ओरल सप्लीमेंट्स तो ले रहे हैं, लेकिन नसों के ज़रिए (IV Drip) ग्लूकोज़ या पानी चढ़वाने से साफ़ इनकार कर दिया है।
कोर्ट का रुख और लाठीचार्ज पर बवाल:
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने ‘इलाज के नाम पर अवैध हिरासत’ का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।
दूसरी तरफ, एम्स और सफदरजंग के डॉक्टरों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोलों और ‘लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज’ की छात्राओं/छात्रों के साथ हुई पुलिस बदसलूकी की निष्पक्ष जाँच की पुरज़ोर मांग की है।
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