नई दिल्ली, 19 जुलाई। दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक व जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था।
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जस्टिस मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सफदरजंग अस्पताल और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने कहा- डॉक्टरों की निगरानी में हैं, जबरदस्ती नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर लगातार वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि उनके साथ कोई जबरदस्ती की जा रही है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया प्रशासन द्वारा उन्हें जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने के फैसले को मनमाना मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने राहत देते हुए निर्देश दिया कि वांगचुक की पत्नी, भाई और अन्य परिजनों को उनसे 24 घंटे मिलने की अनुमति रहेगी।
इलाज के अधिकार और सरकारी व्यवस्था पर बहस
वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उनके मुवक्किल किसी हिरासत में नहीं हैं, इसलिए उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल (मेदांता) में इलाज कराने के मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है और बेहतर स्वास्थ्य के लिए वांगचुक को भी इलाज में सहयोग करना चाहिए।








