ब्यूनस आयर्स Argentina Football 18 jul : फीफा विश्व कप का फाइनल मुकाबला किसी भी देश के लिए सबसे बड़ा गौरव का क्षण होता है। लेकिन अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जावियर माइलि (Javier Milei) ने एक ऐसा चौंकाने वाला फैसला लिया है,

जिसने खेल जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। [आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज] राष्ट्रपति माइलि रविवार को होने वाले ऐतिहासिक विश्व कप फाइनल को लाइव देखने स्टेडियम नहीं जाएंगे, भले ही उनकी अपनी टीम इस महामुकाबले में स्पेन के खिलाफ खिताबी जंग लड़ने उतर रही है।
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NBC न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, जावियर माइलि ने इस बार वीआईपी बॉक्स में बैठकर मैच देखने के बजाय अपने घर पर ही रहने का फैसला किया है। [आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज] लेकिन इस फैसले के पीछे कोई राजनीतिक व्यस्तता या सुरक्षा कारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और दिलचस्प ‘अंधविश्वास’ की कहानी छिपी है।
‘लकी जैकेट’ और अंधविश्वास का वो हैरान करने वाला वाकया
जब ब्यूनस आयर्स के प्रसिद्ध रेडियो स्टेशन एल ऑब्जर्वाडोर के होस्ट ने राष्ट्रपति माइलि से सीधे पूछा कि क्या उनका यह फैसला किसी अंधविश्वास (जिंक्स) पर आधारित है,[आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज] तो माइलि ने बिना किसी झिझक के ‘हाँ’ में जवाब दिया। उन्होंने इसके पीछे की दिलचस्प वजह भी साझा की।
राष्ट्रपति ने बताया कि इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने घर पर बैठकर अर्जेंटीना के सभी 7 मैच देखे हैं और टीम ने हर एक मैच में जीत हासिल की है। वह इस ‘विनिंग स्ट्रीक’ (जीत के सिलसिले) को किसी भी हाल में तोड़ना नहीं चाहते।
क्यों नहीं उतारते अपनी भारी जैकेट? माइलि ने बताया कि स्विट्ज़रलैंड के खिलाफ खेले गए एक मैच के दौरान उन्होंने गर्मी या बेचैनी की वजह से अपनी भारी जैकेट उतार दी थी। जैसे ही उन्होंने जैकेट उतारी, अर्जेंटीना की टीम ने तुरंत एक गोल खा लिया। इस घटना से वह इतने सहम गए कि उन्होंने तुरंत जैकेट वापस पहन ली। उसके बाद से उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में उस जैकेट को नहीं उतारा। अब फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में वह कपड़ों या जगह को बदलने का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते।
वह रविवार को अर्जेंटीना और स्पेन के बीच होने वाले फाइनल मैच को ब्यूनस आयर्स के ओलिवोस स्थित अपने राष्ट्रपति आवास से उसी ‘लकी जैकेट’ को पहनकर देखेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप और फीफा अध्यक्ष के आमंत्रण को किया रिजेक्ट
इस खबर ने तब और जोर पकड़ा जब राष्ट्रपति माइलि को न्यू जर्सी की यात्रा करनी थी। वहां उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के साथ बैठकर वीआईपी स्टैंड से मैच देखना था। पूरी दुनिया की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात पर थीं।[आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज]
लेकिन जब रेडियो होस्ट ने उनसे पूछा कि क्या वह इस यात्रा पर जा रहे हैं, तो माइलि ने दो टूक शब्दों में कहा, “बिल्कुल नहीं।” उन्होंने साफ कर दिया कि वह अपने अंधविश्वास और टीम की भलाई के लिए ओलिवोस में अपने सामान्य स्थान पर ही टिके रहेंगे।
अर्जेंटीना में दशकों पुरानी है यह ‘जिंक्स’ (मुफा) परंपरा
आपको लग सकता है कि जावियर माइलि ऐसा करने वाले पहले राष्ट्रपति हैं, लेकिन अर्जेंटीना के राजनीतिक इतिहास में यह परंपरा दशकों पुरानी है। अर्जेंटीना के राष्ट्राध्यक्ष अक्सर बड़े और उच्च दबाव वाले मैचों में जाने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनकी उपस्थिति टीम के लिए अपशकुन या ‘जिंक्स’ न बन जाए।
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1990 का वो काला इतिहास: इस अंधविश्वास की शुरुआत साल 1990 के विश्व कप से हुई थी। तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस मेनेम अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए स्टेडियम पहुंचे थे। उस मैच में अर्जेंटीना को कैमरून के खिलाफ एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था।
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‘मुफा’ का ठप्पा: इस हार के बाद अर्जेंटीना की जनता ने राष्ट्रपति मेनेम को “मुफा” (Mufa) कहना शुरू कर दिया, जिसका स्पेनिश में अर्थ ‘अपशकुनी’ या ‘जिंक्स’ होता है।[आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज] यह लेबल उन पर ऐसा चिपका कि उसके बाद से आज तक अर्जेंटीना का कोई भी मौजूदा राष्ट्रपति राष्ट्रीय टीम का मैच देखने व्यक्तिगत रूप से स्टेडियम नहीं गया है।
राष्ट्रपति जावियर माइलि भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं ताकि अर्जेंटीना एक बार फिर विश्व विजेता बन सके और उन पर ‘मुफा’ का टैग न लगे।अब देखना यह है कि राष्ट्रपति की यह ‘लकी जैकेट’ और घर से मैच देखने का टोटका अर्जेंटीना को स्पेन के खिलाफ जीत दिला पाता है या नहीं!
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