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“राजस्थान कांग्रेस में महा-बदलाव की आहट: अशोक गहलोत जाएंगे दिल्ली, सचिन पायलट ने PCC चीफ की कुर्सी से क्यों बनाई दूरी?”

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जयपुर/नई दिल्ली 13 जुलाई: राजस्थान की सियासत और कांग्रेस के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चल रही चर्चाओं के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में सत्ता और संगठन के समीकरणों को नए सिरे से साधने की तैयारी में है। इस बड़े फेरबदल के केंद्र में एक बार फिर सूबे के दो दिग्गज नेता—पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हैं।

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अशोक गहलोत को दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी!

सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस आलाकमान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लंबे संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव का फायदा राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की योजना बना रहा है। उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) में एक बेहद मजबूत और महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गहलोत को केंद्र में सक्रिय कर आलाकमान राजस्थान कांग्रेस में नए नेतृत्व को उभरने का मौका देना चाहता है, साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए उनके ‘जादू’ की जरूरत महसूस की जा रही है।

संतुलन का फॉर्मूला और सचिन पायलट की भूमिका

कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में यह हमेशा से तय रहा है कि अगर अशोक गहलोत को केंद्र में कोई बड़ा पद मिलता है, तो राजस्थान में सत्ता या संगठन का संतुलन बनाने के लिए सचिन पायलट को भी कोई बेहद मजबूत भूमिका देनी होगी।

हालांकि, इस बार कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है। चर्चाएं हैं कि पायलट फिलहाल राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) का पद लेने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।

‘कांटों भरा ताज’ क्यों साबित हो सकता है प्रदेश अध्यक्ष का पद?

राजनीतिक विश्लेषकों ने पायलट की इस हिचकिचाहट के पीछे बेहद सटीक और गहरी रणनीतिक वजहें बताई हैं:

  • मध्य प्रदेश और पंजाब का सबक: जानकारों का मानना है कि सचिन पायलट की नजर पंजाब में अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और मध्य प्रदेश में जीतू पटवारी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर है। विपक्ष में रहते हुए प्रदेश अध्यक्ष का पद कांटों भरा ताज होता है, जहां गुटबाजी को संभालना और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरना एक बेहद मुश्किल चुनौती है।

  • लंबा वक्त और बड़ा जोखिम: साल 2029 के लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों में अभी लंबा वक्त है। ऐसे में इतनी जल्दी प्रदेश की कमान संभालकर पायलट अपनी राजनीतिक जमीन और छवि को किसी भी तरह के जोखिम में नहीं डालना चाहते।

रणनीति: सचिन पायलट फिलहाल जल्दबाजी में कोई भी जिम्मेदारी लेने के पक्ष में नहीं हैं। वह राष्ट्रीय स्तर पर ही अपनी मजबूत भूमिका बनाए रखेंगे और आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों में कांग्रेस के लिए सक्रिय रूप से जमीन तैयार करेंगे।

क्या होगा राजस्थान कांग्रेस का भविष्य?

इस संभावित फेरबदल से राजस्थान कांग्रेस में ‘पावर शिफ्ट’ के संकेत मिल रहे हैं:

नेता संभावित नई भूमिका राजनीतिक रणनीति
अशोक गहलोत AICC (दिल्ली) में मजबूत संगठनात्मक पद राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को धार देना
सचिन पायलट राष्ट्रीय महासचिव / यूपी चुनाव प्रभारी जल्दबाजी से बचते हुए भविष्य के लिए खुद को सुरक्षित रखना

अब देखना यह होगा कि दिल्ली की इस बिसात पर राजस्थान के ये दो महारथी अपनी अगली चाल क्या चलते हैं और कांग्रेस आलाकमान इस ‘कांटों भरे ताज’ को किसके सिर पर सजाता है।

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