खास बातें:
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बदलेगी तस्वीर: अबूझमाड़ के सुदूर गांवों में बड़े पैमाने पर होगी कॉफी की खेती।
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विशेषज्ञों की हरी झंडी: जलवायु और मिट्टी को कॉफी उत्पादन के लिए पाया गया बेहद अनुकूल।
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ओडिशा में ट्रेनिंग: बस्तर के कृषि अधिकारी कोरापुट जाकर सीखेंगे कॉफी प्लांटेशन के गुर।
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भविष्य की राह: कॉफी की सफलता के बाद चाय की खेती की भी बनेगी योजना।
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रायपुर/नारायणपुर, 07 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ का सुदूर और वनांचल क्षेत्र ‘अबूझमाड़’ अब अपनी एक नई और महकती पहचान बनाने जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के नए साधन जुटाने के लिए बेहद अनूठी पहल की है। बस्तर के इस अंचल में अब बड़े पैमाने पर कॉफी की खेती शुरू करने की तैयारी कर ली गई है।
इसी सिलसिले में कलेक्टर नारायणपुर ने भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञ दल के साथ कुतुल, कच्चापाल, कोडलियार, ईरकभट्टी और तोके जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तृत जमीनी दौरा किया।
जलवायु और मिट्टी कॉफी के लिए है ‘परफेक्ट’
निरीक्षण के दौरान कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों ने क्षेत्र की वार्षिक वर्षा, तापमान, मिट्टी की प्रकृति और समुद्र तल से ऊंचाई का गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया। बोर्ड के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अबूझमाड़ का प्राकृतिक वातावरण कॉफी उत्पादन के लिए पूरी तरह अनुकूल है। यहाँ ‘कॉफी आधारित कृषि वानिकी मॉडल’ विकसित किया जाएगा, जिससे न सिर्फ जंगलों को बचाया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिलेगा।
4 साल में शुरू होगा उत्पादन; पीढ़ियों को मिलेगी स्थायी आय
विशेषज्ञों के मुताबिक, कॉफी के पौधों को लगाने के बाद करीब 4 वर्षों तक उनके रख-रखाव की जरूरत होती है। इसके बाद व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाता है, जो स्थानीय ग्रामीणों के लिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी नियमित आय का एक मजबूत जरिया बनेगा।
रोजगार की गारंटी: इस पूरी परियोजना में स्थानीय स्व-सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीणों की सीधी भागीदारी होगी, ताकि हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सके। शुरुआती चरण में जमीन का चयन कर प्लांटेशन और स्थानीय स्तर पर नर्सरी तैयार करने का काम शुरू किया जा रहा है।
ओडिशा के कोरापुट में ट्रेनिंग लेंगे बस्तर के अधिकारी
कॉफी बोर्ड के सुझाव पर कलेक्टर ने जिले के कृषि अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए ओडिशा के कोरापुट भेजने के निर्देश दिए हैं। वहाँ अधिकारी कॉफी उत्पादन, पौध प्रबंधन और तकनीकी पहलुओं की बारीकियों को सीखेंगे, ताकि वे वापस लौटकर स्थानीय किसानों का सही मार्गदर्शन कर सकें।
भविष्य में चाय के बागानों से महकेंगी वादियाँ
विशेषज्ञ दल के साथ चर्चा में यह बात भी सामने आई कि अबूझमाड़ की खूबसूरत वादियाँ चाय की खेती के लिए भी उतनी ही उपयुक्त हैं। इसे देखते हुए कलेक्टर ने भविष्य की संभावनाओं पर एक चरणबद्ध कार्ययोजना (Phase-wise Action Plan) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान भारत सरकार कॉफी बोर्ड के उप निदेशक (आंध्र प्रदेश), क्षेत्रीय कॉफी अनुसंधान केंद्र के प्रभारी अधिकारी, कोरापुट के वरिष्ठ संपर्क अधिकारी सहित जिले के कृषि और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।








