नई दिल्ली (द्वारका) 10 जून : राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यहाँ मोहन गार्डन के रहने वाले एक दंपती के साथ आईवीएफ (IVF) इलाज के नाम पर कथित तौर पर बहुत बड़ा धोखा हुआ है। पीड़ित दंपती ने जब अपनी जुड़वां बच्चियों का डीएनए (DNA) टेस्ट कराया, तो रिपोर्ट देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। लैब रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चियों का बायोलॉजिकल मैच न तो अपनी मां से हो रहा है और न ही पिता से। दोनों अस्पतालों की लापरवाही के कारण पीड़ित माता-पिता पिछले पांच महीने से अपने असली बच्चों की तलाश में भटक रहे हैं।
Advt

IVF सेंटर ने दिया था भरोसा, डिलीवरी के समय बदला खेल?
पीड़ित पिता राहुल के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी के इलाज के लिए दिसंबर 2024 में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक बेहद नामी आईवीएफ (IVF) सेंटर से संपर्क किया था।
-
अस्पताल का दावा: इलाज के वक्त डॉक्टरों ने भरोसा दिया था कि इस प्रक्रिया में केवल राहुल के स्पर्म (Sperm) और उनकी पत्नी के एग्स (Eggs) का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
-
अस्पताल बदलना: आईवीएफ प्रक्रिया पूरी होने के बाद, डॉक्टरों की सलाह पर महिला को डिलीवरी के लिए द्वारका के एक अन्य नामी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जनवरी 2026 में हुआ जन्म, शक्ल ने पैदा किया गहरा शक
जनवरी 2026 में महिला ने दो जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। शुरुआत में परिवार में खुशियां थीं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार को अहसास हुआ कि बच्चियों का चेहरा माता-पिता या परिवार के किसी भी सदस्य से बिल्कुल मेल नहीं खा रहा है।
संदेह दूर करने के लिए दंपती ने दो अलग-अलग अधिकृत लैब से डीएनए जांच करवाई। जब दोनों जांचों की रिपोर्ट आई, तो उसमें दावा किया गया कि बच्चियों का डीएनए उनके माता-पिता से 0% मैच है, जिसका साफ मतलब था कि वे बच्चियां उनकी जैविक संतान नहीं हैं।
अस्पतालों ने झाड़ा पल्ला, पीड़ित पर ही मढ़े आरोप
इस खौफनाक सच के सामने आने के बाद जब पीड़ित पिता ने आईवीएफ सेंटर और द्वारका के उस प्राइवेट अस्पताल से संपर्क किया, तो न्याय मिलने के बजाय उन्हें दुत्कार मिली। पीड़ित का आरोप है कि दोनों नामी अस्पतालों ने अपनी गलती मानने के बजाय उल्टा दंपती पर ही बेबुनियाद आरोप लगाने शुरू कर दिए।
थक-हारकर पीड़ित परिवार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) सहित कई उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
साकेत कोर्ट के आदेश के बाद जागी पुलिस
पीड़ित पिता ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया:
“हमारी पहले से ही दो बेटियां हैं और हम बच्चों से बेहद प्यार करते हैं। डीएनए मैच न होने के बाद से हम पिछले पांच महीने से भटक रहे हैं ताकि हमें हमारा अपना सगा बच्चा मिल सके। शिकायत के शुरुआती तीन महीनों तक पुलिस ने हमारी एफआईआर (FIR) तक दर्ज नहीं की।”
इसके बाद पीड़ित ने साकेत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत के कड़े रुख और आदेश के बाद ही पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।
पीड़ित पिता की भावुक अपील: “कराएं अपने बच्चों का DNA टेस्ट”
राहुल का आरोप है कि या तो आईवीएफ लैब में भ्रूण (Embryo) बदला गया है या फिर डिलीवरी के तुरंत बाद अस्पताल में उनके बच्चों की अदला-बदली की गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर एक भावुक अपील की है:
“जिन भी दंपतियों के बच्चों का जन्म जनवरी 2026 में द्वारका के उस नामी अस्पताल में हुआ है, वे सभी एक बार अपने बच्चों का डीएनए टेस्ट जरूर करवाएं।”
पीड़ित परिवार की मांग है कि इस पूरे मामले या संभावित रैकेट की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिल सके और उन्हें उनका बच्चा वापस मिल सके।








