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तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर: विजय सरकार को समर्थन देने वाले 25 AIADMK नेताओं पर गिरी गाज, पलानीस्वामी ने किया निष्कासित

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चेन्नई 14 मई : तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को उस समय ‘सुनामी’ आ गई जब एआईएडीएमके (AIADMK) प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने पार्टी लाइन से हटकर अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की सरकार का समर्थन करने वाले 25 दिग्गज नेताओं और विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस बड़ी कार्रवाई ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

विश्वास मत में ‘बगावत’ और विजय की जीत

तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को नई सरकार के गठन के बाद विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान हुआ। हालिया चुनावों में विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर थी। कांग्रेस के समर्थन के बावजूद बहुमत सुनिश्चित नहीं था, लेकिन एआईएडीएमके के 25 बागी विधायकों का साथ विजय के लिए ‘संजीवनी’ साबित हुआ।

मतदान का गणित:

  • सरकार के पक्ष में: 144 वोट

  • विरोध में: 22 वोट (AIADMK का आधिकारिक गुट)

  • निर्णायक भूमिका: AIADMK के 25 बागी विधायक

दिग्गज नेताओं पर गिरी गाज

पार्टी विरोधी गतिविधियों और व्हिप के उल्लंघन के आरोप में पलानीस्वामी ने कड़ा रुख अपनाया है। हटाए गए नेताओं में एसपी वेलुमणि और सी वी षण्मुगम जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। पलानीस्वामी ने इन नेताओं को पदों से हटाते ही नए जिला सचिवों और पदाधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है, ताकि संगठन पर नियंत्रण बना रहे।

DMK का वॉकआउट और खरीद-फरोख्त के आरोप

सदन में विश्वास मत के दौरान भारी हंगामा हुआ। मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने सदन से वॉकआउट कर दिया और आरोप लगाया कि यह जनादेश का अपमान है और विधायकों की खरीद-फरोख्त की गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री विजय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा:

“हमारी सरकार को मिला समर्थन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और हम विकास, रोजगार और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देंगे।”


AIADMK के लिए अस्तित्व का संकट?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बगावत पलानीस्वामी के कमजोर होते नेतृत्व की ओर इशारा करती है। पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा विजय की बढ़ती लोकप्रियता और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए पाला बदल रहा है। यदि यह असंतोष थमा नहीं, तो एआईएडीएमके में एक औपचारिक विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।

निष्कर्ष

सिनेमा के पर्दे से राजनीति के मंच तक विजय का सफर अब एक मजबूत मोड़ पर पहुंच गया है। जहां एक ओर टीवीके खेमे में उत्साह है, वहीं एआईएडीएमके अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। आने वाले दिन तय करेंगे कि पलानीस्वामी अपनी पार्टी को बिखरने से कैसे बचाते हैं।

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