Latest News
कोरबा में धूमधाम से मना छत्तीसगढ़ राज्योत्सव-2026, विकास की उपलब्धियों और समृद्ध संस्कृति का दिखा संगम नाथद्वारा: श्रीनाथजी मंदिर में “श्री लाल गोविंद मंडान” का शुभारंभ, मर्जादी वैष्णवों के लिए निःशुल्क महाप्रसाद की व्यवस्था शुरू आत्मसम्मान से समझौता नहीं! सिंगर दलेर मेहंदी विवाद पर बोले मंत्री सुबोध उनियाल- ‘इस्तीफा दे दूंगा, पर माफी नहीं मांगूंगा’ आंध्र प्रदेश के तट से टकराया भीषण चक्रवात ‘मुरासु’, 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हवाएं; ओडिशा-पुडुचेरी में अलर्ट धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण टिप्पणी पर गर्माई राजनीति: दिग्विजय बोले ‘मूर्ख’, बघेल का कटाक्ष- ‘रेबीज की जांच हो’ रायपुर: श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल ने पार किया 45 हजार बाल शल्य चिकित्सा का ऐतिहासिक आंकड़ा, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जताई खुशी
Home » राजनीति » अन्ना का ‘अदृश्य’ वार: राघव के बहाने केजरीवाल पर साधा निशाना, क्या भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नायक ने खोल दी आप की पोल?

अन्ना का ‘अदृश्य’ वार: राघव के बहाने केजरीवाल पर साधा निशाना, क्या भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नायक ने खोल दी आप की पोल?

Share:

नई दिल्ली/रालेगण सिद्धि: भारतीय राजनीति में शुक्रवार का दिन किसी बड़े थ्रिलर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा साबित हुआ। आम आदमी पार्टी (AAP) के ‘पोस्टर बॉय’ कहे जाने वाले राघव चड्ढा और उनके साथ अशोक मित्तल व संदीप पाठक जैसे रणनीतिकारों ने अचानक पार्टी को अलविदा कहकर सियासी गलियारों में सन्नाटा खींच दिया। लेकिन इस पूरी कहानी में असली ट्विस्ट तब आया, जब इंडिया अगेंस्ट करप्शन के प्रणेता अन्ना हजारे ने अपनी चुप्पी तोड़ी।

Advt

अन्ना हजारे के इस बयान ने अब एक नई बहस छेड़ दी है: क्या आम आदमी पार्टी अपनी उन बुनियादी नैतिकताओं को खो चुकी है जिनके दम पर वह सत्ता में आई थी?


अन्ना के बयान के 3 बड़े ‘बम’: जिसने बढ़ाई केजरीवाल की बेचैनी

अन्ना हजारे ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। उनके शब्दों में छिपा सस्पेंस पार्टी के भविष्य पर गहरा काला साया डाल रहा है:

  1. “दोष पार्टी का है”: अन्ना ने साफ कहा कि अगर इतने बड़े नेता साथ छोड़ रहे हैं, तो गलती जाने वालों की नहीं, बल्कि पार्टी चलाने वालों की है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि इन नेताओं को यह कदम उठाना पड़ा?

  2. सत्ता और पैसे की अंधी दौड़: अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना अन्ना ने सबसे बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब इंसान पर स्वार्थ हावी हो जाता है, तो वह समाज और देश को भूल जाता है। आज लोग देश सेवा के बजाय सत्ता और पैसे के पीछे भाग रहे हैं।

  3. भीतर की ‘गड़बड़ी’ का संकेत: अन्ना ने रहस्यमयी लहजे में कहा कि “कुछ न कुछ तो कारण होगा” और “कहीं न कुछ गड़बड़ी हुई है”। उनके इस बयान ने उन कयासों को हवा दे दी है कि AAP के भीतर सब कुछ वैसा नहीं है जैसा बाहर से दिखता है।


क्या बिखर रहा है केजरीवाल का कुनबा?

राघव चड्ढा का बीजेपी में जाना केवल एक सांसद का इस्तीफा नहीं है, बल्कि उस भरोसे का टूटना है जिसे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की उपज बताया जाता था। अन्ना हजारे की यह ‘पहली प्रतिक्रिया’ आग में घी डालने का काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्ना के इस प्रहार ने बीजेपी को वो नैतिक हथियार दे दिया है, जिससे ‘आप’ के ‘ईमानदार राजनीति’ के दावों की धज्जियां उड़ सकती हैं।

क्या अन्ना का यह वार केजरीवाल की राजनीति के अंत की शुरुआत है? या फिर ‘आप’ इस सबसे बड़े संकट से उबर पाएगी? जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।

।।।