अस्पताल, होटल और कॉलोनियों के लिए ‘रेड अलर्ट’, नियम तोड़ने पर होगी सीधी कानूनी कार्रवाई
रायपुर 23 अप्रैल 2026 | छत्तीसगढ़ में अब स्वच्छता केवल नारों तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य सरकार ने ‘कचरा पॉलिटिक्स’ और निकायों की सुस्ती को खत्म करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों में बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब शहर को गंदा करने वाले बड़े खिलाड़ी बच नहीं पाएंगे।
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बड़े संस्थानों के लिए ‘रेड अलर्ट’
नगरीय प्रशासन विभाग के नए आदेश ने प्रदेश के सभी होटलों, निजी अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और वीआईपी आवासीय कॉलोनियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
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सेल्फ-डिस्पोजल अनिवार्य: अब इन संस्थानों को अपने परिसर से निकलने वाले गीले कचरे के लिए खुद की कंपोस्टिंग या बायोगैस यूनिट लगानी होगी।
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नगर निगम पर निर्भरता खत्म: अब आप कचरा बाहर फेंककर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।
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विशेष अनुमति का चक्कर: अगर कोई संस्थान अपने यहाँ यूनिट नहीं लगाता है, तो उसे नगरीय निकाय से ‘स्पेशल परमिशन’ लेनी होगी, जो कि जेब पर भारी पड़ने वाले विशेष शुल्क और जुर्मानें के साथ मिलेगी।
कलेक्टर करेंगे ‘सर्जिकल ऑडिट’
यह सिर्फ एक निर्देश नहीं है, बल्कि इस बार जवाबदेही भी तय की गई है। पहली बार जिला कलेक्टरों को मैदान में उतारा गया है।
“हर जिले के कचरा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे का ऑडिट अब सीधे कलेक्टर करेंगे और इसकी गोपनीय रिपोर्ट सीधे मुख्य सचिव को जाएगी। काम में कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है।”
4-लेयर सॉर्टिंग: अब मिक्स कचरा मतलब ‘अपराध’
सरकार ने कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए 4-कैटेगरी नियम को अनिवार्य कर दिया है। अब स्रोत पर ही कचरे को अलग करना होगा:
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गीला कचरा (रसोई का सामान)
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सूखा कचरा (प्लास्टिक, पेपर)
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सैनिटरी वेस्ट (डायपर, नैपकिन आदि)
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विशेष देखभाल वेस्ट (खतरनाक घरेलू कचरा)
इसके लिए निकायों को ‘चार-कक्षीय’ (4-Compartment) कचरा वाहन सड़कों पर उतारने के आदेश दे दिए गए हैं।
लापरवाही पर भारी जुर्माना और जेल
नियमों के मुताबिक, 1 अप्रैल से यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। शुरुआती चरण में नियमों का उल्लंघन करने पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यदि कोई संस्थान या अधिकारी बार-बार लापरवाही बरतता पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार का विजन: ‘वेस्ट टू वेल्थ’
मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) और पुराने डंपसाइट्स (लीगेसी वेस्ट) को खत्म करने के लिए समयबद्ध योजना बनाई गई है। सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के शहरों से कचरे का पहाड़ पूरी तरह गायब हो जाए और संसाधनों का पुनर्चक्रण (Recycling) हो सके।
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