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महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बार एसोसिएशनों को दी मान्यता रद्द करने की चेतावनी

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नई दिल्ली 23 अप्रैल 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी बार एसोसिएशनों को कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण के नियम का पालन करना अब अनिवार्य है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्देश की अनदेखी की गई, तो संबंधित बार एसोसिएशन की मान्यता निलंबित की जा सकती है।

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प्रमुख निर्देश और सख्त रुख

अदालत ने साफ किया कि लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्देश केवल एक औपचारिकता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार:

  • अनिवार्य कोटा: बार काउंसिल और एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व अनिवार्य है।

  • चुनाव और मनोनयन: इसमें 20% सीटें चुनाव के माध्यम से और 10% सीटें को-ऑप्शन (सह-चयन) के जरिए भरी जानी चाहिए।

  • जिला न्यायाधीशों को अधिकार: यदि एसोसिएशन कोटा पूरा करने में विफल रहती हैं, तो जिला न्यायाधीशों को अधिकार दिया गया है कि वे स्वयं महिलाओं को नामित कर इस कमी को पूरा करें।

कदम क्यों जरूरी है?

न्यायालय ने पाया कि वकालत के पेशे में नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की भागीदारी लंबे समय से कम रही है। कोर्ट ने दोहराया कि:

“न्यायिक संस्थाओं में महिलाओं की उपस्थिति से न केवल पारदर्शिता और संतुलन बढ़ता है, बल्कि न्याय प्रणाली में आम जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने सभी निकायों को समयबद्ध तरीके से इन निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया है। इसे कानूनी पेशे में महिलाओं के सशक्तिकरण और समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।


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