Latest News
चुनावी हार के बाद विपक्षी एकजुटता की परीक्षा: मतभेदों के बीच आज दिल्ली में बैठेगा ‘INDIA’ गठबंधन रायपुर में बड़ा एक्शन: बिहार का ₹25 हजार का इनामी अपराधी गिरफ्तार, स्टील फैक्ट्री में छिपा था पहचान बदलकर! BJP नेत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पति को बंदूक देने जाते समय चली गोली कोरबा : ASI के बेटे को गाड़ी से कुचला, पत्रकार को किडनैप कर मरणासन्न छोड़ा, लूटपाट और फायरिंग , पुलिस के हाथ लगे कुछ पुख्ता सुराग छत्तीसगढ़ के ‘रन-मशीन’ आयुष पांडे की टीम इंडिया ‘A’ में एंट्री; श्रीलंका में मचाएंगे धमाल! छत्तीसगढ़ के क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अध्याय!  कोरबा में भाजपा ने शुरू किया महाभियान: मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ से वृक्षारोपण की भव्य शुरुआत
Home » कोरबा » “कोई बात नहीं… आपकी बात सुनना ही हमारा काम है”, बीच सड़क पर रुकी कलेक्टर की कार

“कोई बात नहीं… आपकी बात सुनना ही हमारा काम है”, बीच सड़क पर रुकी कलेक्टर की कार

Share:

कोरबा 21 अप्रैल 2026। अक्सर सरकारी काफिले धूल उड़ाते हुए निकल जाते हैं, लेकिन कोरबा में मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जिले के कलेक्टर कुणाल दुदावत ने यह साबित कर दिया कि प्रशासन जनता के लिए है। उन्होंने बीच सड़क पर अपनी गाड़ी रुकवाकर न केवल एक महिला की गुहार सुनी, बल्कि संवेदनशीलता के साथ उसका समाधान भी किया।

Advt

बैठक में नहीं पहुँच पाई थी महिला

घटना ग्राम करतला की है। कलेक्टर कुणाल दुदावत यहाँ विकास कार्यों का जायजा लेने और ग्रामीणों की समस्याएं सुनने पहुँचे थे। बैठक खत्म होने के बाद जब उनका काफिला गाँव से बाहर निकल रहा था, तभी एक स्कूटी सवार महिला ने हाथ दिखाकर गाड़ी को रुकने का संकेत दिया।

कलेक्टर का बड़प्पन और आत्मीय संवाद

सुरक्षा और प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए कलेक्टर ने तुरंत ड्राइवर को कार रोकने का निर्देश दिया। महिला ने घबराते हुए कहा कि वह देरी के कारण जनसुनवाई में नहीं पहुँच पाई थी, इसलिए अपनी बात कहने यहाँ चली आई। इस पर कलेक्टर ने बेहद सहज भाव से महिला को दिलासा देते हुए कहा:

“कोई बात नहीं… आपकी बात सुनना ही हमारी जिम्मेदारी है, बताइए क्या समस्या है।”

राजस्व अधिकारियों को मौके पर निर्देश

महिला ने अपनी जमीन से जुड़ी समस्या के बारे में विस्तार से बताया। कलेक्टर ने बिना किसी देरी के सड़क पर ही खड़े होकर संबंधित राजस्व अधिकारियों को बुलाया और निर्देश दिए कि इस मामले की तुरंत जांच कर महिला को न्याय दिलाया जाए।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के इस व्यवहार की चर्चा पूरे जिले में हो रही है। लोग इसे प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक मिसाल मान रहे हैं, जहाँ एक अधिकारी ने कुर्सी का अहंकार छोड़ ज़मीन पर उतरकर जनता की पीड़ा को समझा।


।।

Leave a Comment