आगर मालवा: दुनिया चाँद पर जा रही है, लेकिन मध्य प्रदेश के आगर मालवा में असली ‘मिशन’ चप्पल की तलाश में जुटा है। मामला किसी आम इंसान का होता तो वह “जय माता दी” बोलकर नंगे पैर घर चला जाता, लेकिन यहाँ मामला नायब तहसीलदार साहब की चप्पल का है। आखिर ‘प्रशासनिक पैरों’ की सुरक्षा का सवाल जो था!
चप्पल का ‘क्राइम सीन’ और CCTV की पैनी नजर
प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में जहाँ लोग अपनी मुरादें मांगने आते हैं, वहां तहसीलदार साहब अपनी चप्पलें ‘दान’ कर बैठे। पर साहब को ‘पुण्य’ से ज्यादा ‘न्याय’ में भरोसा था। तुरंत मंदिर का कंट्रोल रूम खुला, फुटेज खंगाले गए और किसी जासूसी फिल्म की तरह ‘चप्पल चोर’ को ढूंढ निकाला गया। चोर ने भी शायद सोचा होगा कि चप्पल उठा रहा हूँ, किसी का ‘रसूख’ नहीं, पर वह गलत था।
चप्पल पर ‘धारा’ का तड़का
साहब इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र लिख मारा। मांग की गई है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 और 126 के तहत कार्रवाई हो। अब जनता हैरान है कि जिस देश में बड़ी-बड़ी चोरियों की फाइलें धूल फांक रही हैं, वहां तहसीलदार साहब की ‘हवाई चप्पल’ के लिए पुलिस की कितनी ऊर्जा खर्च होगी?
ज्योतिष बनाम प्रशासन: किसकी जीत?
शास्त्र कहते हैं कि मंदिर से चप्पल चोरी हो जाए तो समझो ‘शनि’ का प्रकोप टल गया और अच्छे दिन आने वाले हैं। लेकिन तहसीलदार साहब को शायद शनि से ज्यादा ‘चोर’ से डर लग रहा है।
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जनता का सवाल: क्या अब पुलिस हर चप्पल चोरी पर FIR लिखेगी?
बॉटम लाइन: अगर अगली बार मंदिर जाएँ और चप्पल गायब मिले, तो समझियेगा कि आप ‘किस्मत वाले’ हैं। लेकिन अगर आप तहसीलदार हैं, तो समझियेगा कि यह ‘कानून व्यवस्था’ की विफलता है!








