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बस्तर की ‘मददगार’ बुधरी ताती को पद्मश्री: अबूझमाड़ के दुर्गम रास्तों से निकलकर समाज सेवा के शिखर तक का सफर

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रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र अबूझमाड़ में समाज सेवा की अलख जगाने वाली बुधरी ताती को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह सम्मान न केवल बुधरी ताती के संघर्षों का प्रतिफल है, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और अटूट सेवा भावना की जीत है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

चार दशकों का निस्वार्थ संकल्प

बुधरी ताती ने पिछले 40 वर्षों से अपना जीवन उन कार्यों के लिए समर्पित कर दिया, जहाँ पहुँचना आज भी एक चुनौती माना जाता है। उनके सेवा कार्य के मुख्य स्तंभ इस प्रकार हैं:

बालिका शिक्षा की मशाल: अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उन्होंने बच्चियों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई।

महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया, जिससे सैकड़ों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आया।

बुजुर्गों की सेवा: उपेक्षित और असहाय बुजुर्गों के लिए वे किसी मसीहा से कम नहीं रही हैं।

संघर्ष से प्रेरणा की ओर

अबूझमाड़ की विषम परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों के बीच काम करना कभी आसान नहीं था। लेकिन बुधरी ताती ने बाधाओं को दरकिनार कर महिलाओं के उत्थान की नई इबारत लिखी। आज वे न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा केंद्र बन गई हैं।

“बुधरी ताती जी को मिला यह सम्मान छत्तीसगढ़ की जनजातीय अस्मिता, संघर्ष और समर्पण की वैश्विक पहचान है।”

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