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सिस्टम की बेरुखी या किसान की बेबसी? 24 घंटे में दूसरे किसान ने पिया जहर; कोरबा में धान खरीदी का संकट गहराया

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कोरबा , छत्तीसगढ़ 13 जनवरी 2026 :  अन्नदाता की बेबसी और सरकारी सिस्टम की सुस्ती अब जानलेवा साबित होने लगी है। कोरबा जिले में धान खरीदी में आ रही तकनीकी बाधाओं और रकबा कटौती की समस्या से परेशान होकर महज 24 घंटे के भीतर दो किसानों ने आत्मघाती कदम उठा लिया। ताजा मामला हरदी बाजार तहसील का है, जहां एक वृद्ध किसान अपनी पीड़ा लेकर तहसील कार्यालय पहुंचा और वहां जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश की।

तहसील दफ्तर में मचा हड़कंप, जनपद उपाध्यक्ष बने मसीहा

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम झांझ निवासी 60 वर्षीय बैसाखू गोंड़ पिता भुरूवा, धान की बिक्री न हो पाने और रकबा कम दिखाए जाने से मानसिक रूप से टूट चुका था। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे वह कीटनाशक पीकर सीधा तहसील कार्यालय पहुंच गया। जैसे ही उसने जहर सेवन की बात बताई, परिसर में हड़कंप मच गया। इसी दौरान वहां से गुजर रहे जनपद उपाध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने संवेदनशीलता दिखाई और तुरंत अपनी गाड़ी से पीड़ित किसान को सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जिससे उसकी जान बच गई।

24 घंटे में दूसरी घटना: प्रशासन के दावों की खुली पोल

हैरानी की बात यह है कि ठीक एक दिन पहले भी जिले में एक अन्य किसान ने इसी समस्या के चलते जहर खाया था। एक ही समस्या पर लगातार दूसरी घटना ने जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर आनन-फानन में पाली एसडीएम रोहित सिंह ने राजस्व अमले की बैठक ली।

कड़ी कार्रवाई: पटवारी सस्पेंड, तहसीलदार को नोटिस

मामले की गंभीरता और लापरवाही को देखते हुए प्रशासन ने ‘हंटर’ चलाया है:

  • हल्का पटवारी कामिनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

  • तहसीलदार और फड़ प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

क्यों जान देने पर आमादा है किसान?

इस पूरे विवाद की जड़ ‘रकबा कटौती’ है। पोर्टल पर किसानों की खेती योग्य जमीन कम दिखाई जा रही है, जिससे वे अपनी पूरी पैदावार नहीं बेच पा रहे हैं। वृद्ध किसान बैसाखू की व्यथा भी यही थी कि मेहनत से उगाई गई फसल को बेचने के लिए उसे दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे थे।

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