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गजब कोरबा : “कागजी बांध और उड़ती लक्ष्मी”

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बंद डैम में भी ‘काम’ चालू है! राख बह रही है नालों में और पैसा बह रहा है फाइलों में

[द खटिया खड़ी न्यूज]

कोरबा, छत्तीसगढ़ 12 जनवरी। अजब-गजब छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक ऐसा ‘जादुई’ CSEB राखड़ डैम (पाड़ीमार) मिला है, जो बंद होने के बाद भी नोट उगल रहा है। वैसे तो यह डैम कागजों में रिटायर हो चुका है, लेकिन इसकी “सेहत” सुधारने के लिए हर साल लाखों रुपये का टॉनिक (मेंटेनेंस फंड) पिलाया जा रहा है। धन्य हैं वे अफसर और ठेकेदार, जिन्होंने बिना एक फावड़ा चलाए फाइलों में तटबंधों को फौलादी बना दिया!

राख की ‘होम डिलीवरी’ इंजीनियरों की दूरदर्शिता देखिए—उन्होंने राख को रोकने की जहमत नहीं उठाई, शायद इसलिए कि राख खुद चलकर नाले के रास्ते ग्रामीणों के घर, खेत और फेफड़ों तक पहुँच सके। अब करीब 3 लाख मीट्रिक टन राख सैर पर निकली है। ग्रामीणों को मुफ्त में आंखों में जलन और त्वचा रोग मिल रहे हैं, जिसे शायद विभाग ‘जनसेवा’ मान रहा है।

फाइलों में मजबूती, हकीकत में मजबूरी विभागीय फाइलों को पढ़कर लगता है कि पाड़ीमार डैम चीन की दीवार से भी ज्यादा मजबूत हो चुका है। मिट्टी भराव और मरम्मत के काम ऐसे हुए हैं कि वे केवल दिव्य दृष्टि वाले अधिकारियों को ही नजर आते हैं। जमीन पर तो सिर्फ राख का दरिया है। सच ही है, जब जेबें गरम हों, तो ठंडी राख की परवाह किसे है?

भ्रष्टाचार का ‘पावन’ संगम यह मामला लापरवाही का नहीं, बल्कि ‘कलाकारी’ का है। अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच ऐसा अटूट प्रेम है कि जनता खांसती रहे, बस्तियां राख से पट जाएं, लेकिन मेंटेनेंस का बजट नहीं रुकना चाहिए। आखिर विकास की गंगा (यानी राख) बहती रहनी चाहिए!