Latest News
आंध्र प्रदेश के तट से टकराया भीषण चक्रवात ‘मुरासु’, 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हवाएं; ओडिशा-पुडुचेरी में अलर्ट धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण टिप्पणी पर गर्माई राजनीति: दिग्विजय बोले ‘मूर्ख’, बघेल का कटाक्ष- ‘रेबीज की जांच हो’ रायपुर: श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल ने पार किया 45 हजार बाल शल्य चिकित्सा का ऐतिहासिक आंकड़ा, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जताई खुशी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का रायपुर दौरा आज: ‘विकसित भारत संकल्प पार्क’ का करेंगे उद्घाटन,दौरे का पूरा मिनट-टू-मिनट शेड्यूल राज्योत्सव कार्यक्रम के दौरान एक पत्रकार के साथ मारपीट का मामला सामने आया, CAF आरक्षक निलंबित अरब सागर में भारतीय नौसेना का बड़ा पराक्रम: 48 घंटे के सुनियोजित रेस्क्यू ऑपरेशन में मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ और 20 क्रू मेंबर्स सुरक्षित मुक्त
Home » छत्तीसगढ़ » वाह रे विकास! दरिमा के रनवे पर अब ‘कागजी विमान’ ही भर रहे उड़ान

वाह रे विकास! दरिमा के रनवे पर अब ‘कागजी विमान’ ही भर रहे उड़ान

Share:

अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ 12 जनवरी। अगर आप सोच रहे हैं कि अंबिकापुर के दरिमा स्थित माँ महामाया एयरपोर्ट से हवाई यात्रा करने के लिए आपको पासपोर्ट या टिकट की जरूरत है, तो आप गलत हैं। फिलहाल यहाँ उड़ान भरने के लिए बस एक पुरानी नोटबुक का पन्ना और उसे मोड़ने की कला चाहिए। सरगुजा के लोगों का ‘हवाई सपना’ अब इसी कागजी जहाज की तरह हल्का होकर हवा में तैर रहा है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

साहब, वो 19 सीटर था या ‘मिस्टर इंडिया’?

बड़े जोर-शोर से 19 दिसंबर 2024 को प्रधानमंत्री जी ने वर्चुअल बटन दबाया, फूल बरसे, और फ्लाइंग विग कंपनी का 19 सीटर विमान रनवे पर ऐसे दौड़ा जैसे सीधे मंगल ग्रह जाएगा। वादा था कि 1000 रुपये में आम आदमी भी ‘हवाई चप्पल’ पहनकर ‘हवाई सफर’ करेगा। लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। विमान उड़ा तो सही, पर ऐसा गायब हुआ कि अब दूरबीन लेकर ढूंढने पर भी आसमान में नहीं दिखता। जनता पूछ रही है- विमान उड़ान भर रहा है या लुका-छिपी खेल रहा है? आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

कांग्रेस का ‘पेपर प्लेन’ प्रोटेस्ट

इस अघोषित बंदी और बढ़ते किराए से नाराज कांग्रेसियों ने बीते दिनों एयरपोर्ट के बाहर एक ‘हाई-टेक’ प्रदर्शन किया। जब असली जहाज नहीं मिला, तो उन्होंने कागज के विमान उड़ाकर अपनी भड़ास निकाली। नेताओं का तंज था कि जिस एयरपोर्ट को 72 सीटर विमानों के लिए करोड़ों खर्च कर तैयार किया गया, वहाँ अब सिर्फ बच्चों के खेलने वाले कागजी जहाज ही लैंड कर पा रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

किराया बढ़ा, सुविधा घटी

हैरानी की बात यह है कि सेवा बंद है, लेकिन चर्चा किराये बढ़ने की है। यानी ‘न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी’। जब विमान ही नहीं है, तो किराया चाहे एक हजार हो या एक लाख, आम आदमी की जेब तो वैसे ही सुरक्षित है! सरगुजा की जनता अब रनवे को निहार रही है कि शायद कभी कोई असली इंजन की आवाज सुनाई दे, वरना कागज के जहाज उड़ाने की ट्रेनिंग तो कांग्रेस ने दे ही दी है।