Power Tussle Over ‘In-Charge’ Tag: Tikamgarh SP Issues Show-Cause Notices to 26 Staffers
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में इन दिनों खाकी के भीतर एक अजीबोगरीब ‘शब्द युद्ध’ छिड़ा हुआ है। पुलिस अधीक्षक (SP) मनोहर सिंह मंडलोई के एक फरमान ने पूरे महकमे की रातों की नींद उड़ा दी है। ट्रेनिंग से लौटते ही साहब का पारा इतना चढ़ा कि उन्होंने एक साथ 26 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया।
क्या है पूरा विवाद?
मामला पदनाम (Designation) से जुड़ा है। दरअसल, एसपी मंडलोई 26 दिनों की ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद गए थे। उनकी गैर-मौजूदगी में जिले की कमान सीनियर आईपीएस अधिकारी और 18वीं बटालियन के कमांडेंट आलोक कुमार सिंह को सौंपी गई थी।
विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रेनिंग से लौटे एसपी मंडलोई ने फाइलों का अवलोकन किया। उन्होंने पाया कि उनकी अनुपस्थिति में जारी आदेशों में आलोक कुमार सिंह के नाम के आगे ‘प्रभारी पुलिस अधीक्षक’ के बजाय सीधे ‘पुलिस अधीक्षक’ लिखा गया था। बस, यही ‘प्रभारी’ शब्द गायब होना साहब को नागवार गुजरा और उन्होंने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिसों की झड़ी लगा दी।
निशाने पर आए रक्षित निरीक्षक से लेकर साइबर सेल तक
एसपी के गुस्से का शिकार होने वालों में कोई एक विभाग नहीं, बल्कि पूरी फेहरिस्त है:
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आरआई (RI): कनक सिंह
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ट्रैफिक टीआई: कैलाश कुमार पटेल
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साइबर सेल एसआई: मयंक नागच
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इसके अलावा स्टेनो और ऑफिस स्टाफ सहित कुल 26 लोग अब 3 दिन के भीतर जवाब देने के दबाव में हैं।
रिटायर्ड अफसरों ने बताया ‘तुगलकी फरमान’
इस कार्रवाई पर पुलिस जगत के जानकारों ने हैरानी जताई है। रिटायर्ड डीएसपी मुबारक खान ने इस कदम को ‘बचकानी और तुगलकी मानसिकता’ करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि जब गृह विभाग ने विधिवत प्रभार सौंपा था, तो सीनियर अधिकारी द्वारा ‘पुलिस अधीक्षक’ के रूप में हस्ताक्षर करना पूरी तरह वैधानिक है। चर्चा है कि इस तरह के छोटे तकनीकी मुद्दों पर नोटिस देने से पुलिस बल का मनोबल गिरता है।
सोशल मीडिया पर ‘सिस्टम’ की किरकिरी
फिलहाल यह नोटिस सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। माना जा रहा है कि किसी प्रताड़ित कर्मचारी ने ही इसे वायरल किया है। जहां एक ओर कर्मचारी डरे हुए हैं, वहीं एसपी मंडलोई ने इस पूरे विवाद पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है।








