कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्डस लिमिटेड (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र में कार्यरत नीलकंठ प्राइवेट लिमिटेड की साइट पर हुए हिंसक प्रदर्शन और श्रमिकों के साथ मारपीट के मामले में आरोपियों को राहत नहीं मिली है। कोरबा सेशन कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से भी उन्हें निराशा हाथ लगी थी।
क्या था पूरा मामला?
बीते सप्ताह छत्तीसगढ़ क्रांतिसेना के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर कुसमुंडा स्थित नीलकंठ कंपनी की साइट पर उग्र प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि वहां काम कर रहे अन्य राज्यों के कर्मचारियों और श्रमिकों के साथ गाली-गलौज करते हुए उनके साथ बुरी तरह मारपीट की। इस घटना से कार्यस्थल पर अफरा-तफरी और भय का माहौल निर्मित हो गया था।
भय के साए में श्रमिक, पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित किया। उपद्रव का आलम यह था कि डरे-सहमे श्रमिकों ने काम करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद प्रबंधन ने उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया। श्रमिकों की शर्त थी कि जब तक कैंप में पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, वे काम पर नहीं लौटेंगे। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया था।
प्रदर्शनकारियों के तेवर पड़े ठंडे
कड़ी कानूनी कार्रवाई और कोर्ट से जमानत न मिलने के कारण अब क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों के हौसले पस्त नजर आ रहे हैं।
अब हाईकोर्ट ही अंतिम विकल्प
स्थानीय अदालत और फिर सेशन कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब आरोपियों के पास केवल बिलासपुर हाईकोर्ट का विकल्प शेष है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार
स्थानीय बेरोजगार युवाओं को नौकरी न देकर बाहर की कंपनी दूसरे राज्य के लोगों को कार्य पर रखा जा रहा हैं, जबकि स्थानीय बेरोजगार लोगों की मांग हैं कि जरूरत के हिसाब से कंपनी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दे। इस दिशा में शासन प्रशासन को भी ध्यान देने की जरूरत है। ताकि कुसमुंडा जैसी घटना फिर से न दोहराई जाए।








