दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल दंतेवाड़ा से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। अबूझमाड़ के जंगलों के बीच रहने वाली 14 वर्षीय आदिवासी बालिका राजेश्वरी एक ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है, जो उसके जीवित शरीर को धीरे-धीरे ‘पत्थर’ में तब्दील कर रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, बेबस परिवार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अपनी लाड़ली की जान बचाने की गुहार लगाई है।


4 साल की उम्र से शुरू हुआ ‘यातना’ का सफर


परिजनों के अनुसार, राजेश्वरी जब मात्र चार साल की थी, तब उसके शरीर पर छोटे-छोटे फफोले दिखने शुरू हुए थे। देखते ही देखते ये फफोले सख्त होते गए और आज आलम यह है कि बच्ची का उठना-बैठना और चलना-फिरना भी दूभर हो गया है। बच्ची के हाथ-पैर और शरीर के अंगों पर किसी पेड़ की छाल या पत्थर जैसी सख्त परतें जम गई हैं, जिनमें गहरी दरारें साफ देखी जा सकती हैं।
क्या है यह दुर्लभ बीमारी?
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, राजेश्वरी ‘इचथियोसिस हिस्ट्रीक्स’ (Ichthyosis Hystrix) नाम के बेहद दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित है।
मछली जैसी त्वचा: ‘इचथियोसिस’ का अर्थ है मछली के तराजू जैसी खाल। इसमें त्वचा पर केराटिन का अत्यधिक जमाव हो जाता है।
दुनिया में मात्र 24 मामले: बताया जा रहा है कि पूरी दुनिया में इस बीमारी के अब तक केवल 24 मामले ही दर्ज किए गए हैं, जिसके कारण इस पर शोध और इसका सटीक इलाज चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर उठी मदद की मांग
राजेश्वरी का मामला सबसे पहले 2020 में सुर्खियों में आया था, लेकिन हाल ही में दिसंबर 2025 में उसका नया वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। वीडियो में बच्ची की बेबसी साफ झलक रही है। गरीबी और संसाधनों के अभाव में यह आदिवासी परिवार अपनी बेटी को तिल-तिल मरते देखने को मजबूर है। अब पूरे प्रदेश की नजरें सरकार पर टिकी हैं कि क्या राजेश्वरी को देश के बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिल पाएगी?
मुख्य लक्षण जो राजेश्वरी को बना रहे लाचार:
कठोर त्वचा: केराटिन के कारण शरीर का पत्थर जैसा सख्त होना।
कांटेदार परतें: शरीर पर सींग जैसी नुकीली और खुरदरी परतों का उभरना।
असहनीय दर्द: त्वचा फटने और गहरी दरारों के कारण दैनिक कार्यों में कष्ट।








