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KORBA: किसानों की चिंता बढ़ी,, वन विभाग हाथी-मानव द्वंद रोकने में असफल

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KORBA: Farmers’ worries increased, forest department failed to stop elephant-human conflict

छत्तीसगढ़/कोरबा: जिले में हाथी और मानव द्वंद कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है. कोरबा वनमंडल के पसरखेत और कुदमुरा रेंज में मौजूद हाथियों ने कई खेतों में फसलों को बर्बाद किया है. इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है. ग्रामीण और किसान जिला प्रशासन और वन विभाग से फसल सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं. वहीं, खेत में बिजली का तार बिछाने से एक हाथी उसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई. यह मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि एक और शावक की जान चली गई महज यह शावक दो ही दिन का था। वन विभाग के अनुसार मौत का कारण निमोनिया है। शव का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कर दिया गया हैं। चलिए चलते हैं मानव-हाथी द्वंद विषय पर..

 अपनी फसल बचाने  किसानों की चिंता बढ़ी 

लगातार धान और मूंगफली की फसल को रौंदकर हाथी नुकसान पहुंचा रहे हैं. दूसरी तरफ किसान भी अपने फसल की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं. इसके लिए कुछ किसान अनैतिक उपाय अपनाने लगते हैं. एक दिन पहले तीन किसानों ने बिजली का तार खेत में बिछा दिया. जिसकी चपेट में आने से हाथी की मौत हो गयी. फसल बर्बाद होने से बचाने के लिए किसान अपने मुताबिक उपाय अपना रहे हैं. जबकि वन अमले की कार्यशैली सवालों के घेरे में है.

जंगल की निगरानी

हाथियों को जंगल तक सीमित रखना, जंगल में ही उनके लिए पर्याप्त भोजन पानी और अन्य संसाधन उपलब्ध कराना वन विभाग का अहम काम है. बीट गार्ड को एक कंपार्टमेंट का इलाका निगरानी के लिए सौंपा जाता है. पूरा जंगल छोटे-छोटे कंपार्टमेंट में विभाजित रहता है. प्रत्येक कंपार्टमेंट के लिए जवाब देही तय रहती है. इसकी निगरानी में भी ढिलाई बरती जाती है.

ना हाथी बच रहे ना फसल

लाखों, करोड़ों खर्च कर लेमरू हाथी रिजर्व भी बनाया गया. लेकिन बावजूद इसके हाथी भी मर रहे हैं और किसानों के फसल भी बर्बाद हो रहे हैं. वन विभाग का कहना है की फसल से आकर्षित होकर हाथी खेतों की तरफ चले जाते हैं. जबकि ग्रामीण कहते हैं कि वन विभाग से कोई मदद नहीं मिलती. हाथियों को फसल से दूर रखने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जाता.

कोरबा मंडल की स्थिति

जानकारी के अनुसार पसरखेत रेंज में 11 की संख्या में हाथी पिछले कुछ दिनों से सक्रिय हैं. जबकि कुदमुरा रेंज में 25 हाथी विचरण कर रहे हैं. पसरखेत रेंज में सक्रिय हाथियों के दल ने पिछले कुछ दिनों से मदनपुर परिसर के ग्राम छिरमहुआ में उत्पात मचाया. 5 ग्रामीणों के खेत और बाड़ी में लगे धान और मूंगफली फसल को तहस-नहस कर दिया.

वन सुरक्षा प्रणाली पर सवाल

जंगल में हाथियों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण और निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि शावक की मौत भले ही प्राकृतिक कारणों से हुई हो, लेकिन हाल ही में हुई करंट से मौत और उसके बाद यह घटना वन विभाग की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

*क्या कहता है ग्राउंड रियलिटी ?

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से हाथियों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा और निगरानी के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं। वन्यजीवों की रक्षा को लेकर विभागीय दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच अंतर साफ झलकता है ।

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