रायपुर/रायगढ़ 19 सितंबर 2026 Chakradhar Samaroh : संस्कृति, कला और संगीत की त्रिवेणी रायगढ़ में आयोजित 41वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या सूफी संगीत, कबीर वाणी और भक्ति भजनों के रंग में सराबोर रही। इस शाम को अविस्मरणीय बनाया प्रसिद्ध संगीत साधक पद्मश्री डॉ. भारती बंधु की रूहानी प्रस्तुति ने, जिसने पूरे प्रेक्षागृह को भक्ति और आनंद के भाव से सराबोर कर दिया।

गणेश वंदना से आगाज, कबीर वाणी से बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ पारंपरिक गणेश वंदना के साथ हुआ। इसके बाद डॉ. भारती बंधु ने भक्ति और सूफी भजनों की अविरल धारा प्रवाहित की। ‘बोलो राम राम’, ‘राधे-राधे’ और कबीर के प्रसिद्ध दोहे ‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट’ की गूंज पर दर्शक भक्ति रस में गोते लगाते दिखे।
उनकी विशिष्ट गायन शैली और कबीर के पदों के जीवंत प्रस्तुतीकरण ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। उन्होंने प्रसिद्ध रचनाओं:
-
‘कबीरा बिगड़ गयो राम दुहाई’
-
‘छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाई के’
-
‘मेरा पिया घर आया, ओ राम जी’
-
‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’
की एक के बाद एक भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट और कबीर वाणी की गूंज से भक्तिमय हो उठा।
57 वर्षों की साधना और 5 पीढ़ियों की विरासत
प्रस्तुति के दौरान 67 वर्षीय पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने चक्रधर समारोह के साथ अपने दशकों पुराने आत्मीय संबंधों को याद किया।
-
स्मृतियों के पन्ने: उन्होंने कहा कि वे इस ऐतिहासिक समारोह को इसके शुरुआती दिनों से जानते हैं। बीते वर्षों में इसका स्वरूप काफी भव्य और विस्तृत हुआ है, तथा इस मंच पर प्रस्तुति देना उनके लिए गौरव की बात है।
-
पारंपरिक निरंतरता: डॉ. भारती बंधु ने बताया कि उनका परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से भक्ति और सूफी संगीत की परंपरा को सहेज रहा है। वे स्वयं 57 वर्षों से गायन कर रहे हैं, जबकि उनके पुत्र अब छठी पीढ़ी के रूप में इस समृद्ध संगीत विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
सूफी संगीत, कबीर के दर्शन और भक्ति गीतों के इस अद्भुत संगम ने 41वें चक्रधर समारोह की इस संध्या को कला-प्रेमियों के लिए चिरस्मरणीय बना दिया।








