बिलासपुर/रायपुर 6 मई : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरराज्यीय शराब नीति घोटाले से जुड़े एक कथित मामले में राज्य के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को बड़ी राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) मंजूर कर ली है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की उन दलीलों को स्वीकार किया जिसमें जांच की प्रक्रिया और क्षेत्राधिकार पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
‘एवरग्रीन अरेस्ट’ की रणनीति का आरोप
अदालत में अनिल टुटेजा का पक्ष रखते हुए प्रसिद्ध अधिवक्ता अर्शदीप सिंह खुराना ने जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि टुटेजा को बार-बार अलग-अलग मामलों में फंसाया जा रहा है ताकि उनकी रिहाई को रोका जा सके। एडवोकेट खुराना ने इसे जांच एजेंसियों की “एवरग्रीन अरेस्ट” (हमेशा गिरफ्तार रखने की साजिश) की रणनीति करार दिया।
क्षेत्राधिकार और सबूतों पर उठाए सवाल
डिफेंस की ओर से मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु रखे गए:
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क्षेत्राधिकार की कमी: जिस FIR के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, उसका संबंध झारखंड से बताया जा रहा है, जबकि झारखंड में टुटेजा के खिलाफ न तो कोई FIR है और न ही उन्हें वहां आरोपी बनाया गया है।
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सबूतों का अभाव: वकील ने तर्क दिया कि कथित साजिश से जोड़ने वाला कोई भी डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन या दस्तावेजी प्रमाण मौजूद नहीं है।
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कोई अवैध संपत्ति नहीं: सालों तक चली जांच और कई बार की गई छापेमारी के बावजूद टुटेजा के पास से कोई भी आय से अधिक संपत्ति बरामद नहीं हुई है।
कोर्ट का फैसला
मामले की गंभीरता और बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए तथ्यों पर गौर करने के बाद, हाई कोर्ट ने माना कि वर्तमान मामले में आरोपी के खिलाफ ठोस आधार की कमी है। इसी के आधार पर अदालत ने अनिल टुटेजा की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
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