कोलकाता 7 मई : राजनीति में जब मौसम बदलता है, तो सबसे पहले बड़े-बड़े ‘दिग्गज’ सुरक्षित ठिकानों की तलाश शुरू कर देते हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनावी नैया डूबते ही प्रशासनिक गलियारों से सबसे बड़ी खबर आ रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे चहेते और उनके ‘संकटमोचक’ माने जाने वाले पूर्व IAS अधिकारी अलपन बंद्योपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
जिसके लिए केंद्र से ले ली थी ‘दुश्मनी’, उसने ही ऐन वक्त पर छोड़ा साथ
यह वही अलपन बंद्योपाध्याय हैं, जिनके लिए ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से सीधा पंगा ले लिया था। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//साल 2021 का वह दौर याद कीजिए, जब केंद्र सरकार ने अलपन को दिल्ली तलब किया था, लेकिन दीदी ने उन्हें छोड़ने से साफ इनकार कर दिया था। केंद्र और राज्य के बीच हफ्तों तक चली उस ‘कानूनी जंग’ में ममता बनर्जी ने अलपन को अपना सबसे भरोसेमंद सिपहसालार बताया था। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें ‘मुख्य सलाहकार’ की कुर्सी दी गई, लेकिन जैसे ही 2026 के नतीजों ने टीएमसी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वफादारी की ‘एक्सपायरी डेट’ खत्म हो गई।
सत्ता जाते ही ‘अपनों’ ने दिखाई आंख
ममता बनर्जी के लिए यह हार से भी बड़ा निजी झटका माना जा रहा है। सियासी जानकारों का कहना है कि अलपन बंद्योपाध्याय का इस्तीफा इस बात का साफ संकेत है कि बंगाल की नौकरशाही अब ‘पुरानी मालिक’ के प्रति वफादार रहने के मूड में नहीं है।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//कल तक जो अधिकारी दीदी के एक इशारे पर केंद्र सरकार के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल देते थे, आज वे खुद ही दीदी का साथ छोड़कर किनारे लग गए हैं।
क्या जहाज डूबता देख सबसे पहले भाग निकले अलपन?
सोशल मीडिया से लेकर कोलकाता की सड़कों तक अब एक ही चर्चा है— ‘क्या वफादारी सिर्फ सत्ता रहने तक ही थी?’ जिस अधिकारी को बचाने के लिए ममता बनर्जी ने अपनी पूरी सरकार की साख दांव पर लगा दी थी, उसी अधिकारी ने मुश्किल घड़ी में दीदी का साथ देना गंवारा नहीं किया।
ममता का इस्तीफे से इनकार और ‘राष्ट्रपति शासन’ की चुनौती
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “वे चाहें तो मुझे हटा दें या राष्ट्रपति शासन लगा दें, लेकिन मैं हार नहीं मानूंगी।”
सुप्रीम कोर्ट से लेकर ICJ तक जाने की तैयारी
चुनावी नतीजों को ‘धांधली’ करार देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा को कम से कम 100 सीटों पर गलत तरीके से जिताया गया है। उन्होंने ईवीएम (EVM) की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि वे इन नतीजों को सुप्रीम कोर्ट और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) में भी चुनौती देंगी।
इसे कहते हैं असली ‘खेला’! सत्ता रही तो वफादारी की कसमें, और सत्ता गई तो ‘आप कौन और हम कौन?’ इस इस्तीफे ने साबित कर दिया कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता।







