Latest News
छत्तीसगढ़ में अनोखा मामला: DEO ने थाना प्रभारी को थमाया नोटिस, 7 साल तक जेल में बंद रहा शिक्षक और विभाग को भनक तक नहीं लगी! 4 करोड़ का कैश, सीक्रेट चेंबर और कोर्ट का झटका: छत्तीसगढ़ के चर्चित कैश जब्ती मामले में आया नया मोड़! लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती पर गूंजा राष्ट्रीय एकता का संकल्प, मंत्री लखन लाल देवांगन व भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने अर्पित किए श्रद्धासुमन चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर: छत्तीसगढ़ में प्रभावित किसानों को जल्द मिलेगी राहत, सीएम साय ने दिए सर्वे के निर्देश छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के बाद सियासी घमासान: सुधांशु त्रिवेदी बोले— ‘जंगल से नक्सलवाद गया, पर दिल्ली में ‘दिमागी नक्सल’ बाकी’ रात को सोते समय पैरों के तलवों में जलन क्यों होती है? जानिए कारण, राहत के उपाय और कब लें डॉक्टर की सलाह
Home » रायपुर » बिलासपुर » प्यारे लाल कंवर परिवार ट्रिपल मर्डर केस: हाईकोर्ट ने दो की सजा बरकरार रखी, तीन को किया बरी

प्यारे लाल कंवर परिवार ट्रिपल मर्डर केस: हाईकोर्ट ने दो की सजा बरकरार रखी, तीन को किया बरी

Share:

बिलासपुर: अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम प्यारे लाल कंवर के परिवार में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए पांच आरोपियों में से दो की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, जबकि तीन अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।

क्या था पूरा मामला? यह सनसनीखेज वारदात साल 2021 में कोरबा जिले में हुई थी। पूर्व डिप्टी सीएम के बेटे हरीश कंवर, उनकी पत्नी और उनकी चार साल की मासूम बेटी की उनके ही घर में निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।

हत्या की वजह पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि हत्या की मुख्य वजह पारिवारिक जमीन और मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद था। साजिश के पीछे परिवार के ही करीबी सदस्यों का हाथ होने का आरोप लगा था।

अदालती कार्यवाही

  • निचली अदालत: कोरबा की निचली अदालत ने सभी पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

  • हाईकोर्ट का रुख: आरोपियों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। मामले की सुनवाई के बाद माननीय न्यायालय ने दो आरोपियों की संलिप्तता को सही पाया, लेकिन बाकी तीन आरोपियों को ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) देते हुए रिहा करने का आदेश दिया।


।।