📍 निवेश से लगेंगी 8 नई कोकिंग कोल वाशरी
नई दिल्ली 28 मार्च 2026 : भारत को कोयला क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। कंपनी ने 3,300 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ 8 नई कोकिंग कोल वाशरी स्थापित करने की घोषणा की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू कोयले की गुणवत्ता में सुधार करना और विदेशों से होने वाले महंगे आयात पर लगाम लगाना है।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
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क्षमता विस्तार: इन 8 नई वाशरी की कुल धुलाई क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MT/Y) होगी।
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समय सीमा: कोल इंडिया का लक्ष्य इन सभी संयंत्रों को वित्त वर्ष 2030 तक पूरी तरह चालू करने का है।
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सहायक कंपनियों का योगदान: * सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL): यहाँ 5 वाशरी लगेंगी (क्षमता: 14.5 MT/Y)।
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भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL): यहाँ 3 वाशरी लगेंगी (क्षमता: 7 MT/Y)।
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आधुनिकीकरण: नई वाशरी के अलावा, पुराने 10 संयंत्रों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा।
गुणवत्ता और निजी भागीदारी:
भारतीय कोयले में राख (Ash) की मात्रा अधिक होने के कारण स्टील इंडस्ट्री को आयातित कोयले पर निर्भर रहना पड़ता है। इन वाशरी के माध्यम से कोयले को साफ कर उसकी राख कम की जाएगी, जिससे वह वैश्विक मानकों के बराबर हो सके। इसके लिए कोल इंडिया टाटा स्टील लिमिटेड के साथ तकनीकी सहयोग भी कर रही है।
मुद्रीकरण (Monetization) की रणनीति
सरकार की परिसंपत्ति मुद्रीकरण नीति के तहत, सीआईएल अपनी पुरानी और बंद पड़ी तीन वाशरी को निजी हाथों में सौंपने या उनके मुद्रीकरण की संभावनाओं पर भी काम कर रही है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
गूगल सर्च
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