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साहब की ‘जुबान’ फिसली या कुर्सी? ड्राइवर को ‘मर्यादा’ सिखाने वाले इंजीनियर साहब खुद नपे!

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नवा रायपुर 17 मई : कहते हैं कि कलयुग में ‘शब्द’ ही बाण होते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के एक साहब ने इन बाणों को ऐसा चलाया कि वो लौटकर उन्हीं की कुर्सी को ले डूबे। जांजगीर-चांपा में पदस्थ कार्यपालन अभियंता (EE)  शशांक सिंह जी ने शायद यह मान लिया था कि सरकारी गाड़ी के साथ-साथ ड्राइवर की ‘इज्जत’ भी विभाग ने उन्हें लीज पर दे रखी है।

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गाली ‘प्रसाद’ का वायरल चमत्कार

मामला 12 मई का है, जब साहब का पारा सातवें आसमान पर था। उन्होंने अपने अधीनस्थ ड्राइवर को फोन पर ऐसे ‘मधुर’ और ‘संस्कारी’ शब्दों से नवाजा कि सुनने वालों के कान धन्य हो गए। साहब ने सिर्फ ड्राइवर को ही नहीं, बल्कि जिले के आला अधिकारियों को भी अपनी शब्दावली के लपेटे में ले लिया। उन्हें शायद अंदाज़ा नहीं था कि जिस मोबाइल पर वो ‘रौब’ झाड़ रहे हैं, उसका रिकॉर्डिंग बटन उनकी सस्पेंशन की पटकथा लिख रहा है।


जब ऑडियो बना ‘विलेन’

जैसे ही साहब के कुवचनों का ऑडियो सोशल मीडिया पर “वायरल” हुआ, प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुली। जांच बैठी और नतीजा वही निकला जो अक्सर ‘बड़बोलेपन’ का निकलता है। कलेक्टर साहब की रिपोर्ट ने मुहर लगा दी कि साहब ने मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को पार कर फुटबॉल बना दिया था।

अब ‘शिवनाथ भवन’ में कटेगा वनवास

सरकार ने भी बिना देर किए साहब को ‘निलंबन’ का रिटर्न गिफ्ट दे दिया है। अब साहब को नवा रायपुर के ‘शिवनाथ भवन’ में बैठकर अपनी शब्दावली सुधारने का पर्याप्त समय मिलेगा। नियम 1966 की ऐसी धारा लगी है कि अब साहब सिर्फ ‘जीवन निर्वाह भत्ता’ पाएंगे और सोचेंगे कि काश! उस दिन जुबान पर थोड़ा ‘वॉटर हार्वेस्टिंग’ कर लिया होता।

सीख: कुर्सी कितनी भी बड़ी हो, अगर जुबान छोटी (अमर्यादित) हो जाए, तो सस्पेंशन का रास्ता बड़ा हो जाता है।

आदेश पत्र


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