बूथ स्तर तक का संगठन समाप्त; अब सिफारिश नहीं, सिर्फ जमीनी संघर्ष और सक्रियता से मिलेगी जगह
नई दिल्ली/रायपुर, 16 मई। छत्तीसगढ़ की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने एक बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।// आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// शनिवार को जारी इस कड़े आदेश के बाद से ही सूबे के राजनीतिक गलियारों और कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है।
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इस फैसले के तहत प्रदेश से लेकर सबसे निचली कड़ी यानी बूथ स्तर तक की सभी जिम्मेदारियों को समाप्त कर दिया गया है।// आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह कदम महिला कांग्रेस को नए सिरे से अधिक आक्रामक, सक्रिय और प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बड़े पुनर्गठन के संकेत: ‘पैराशूट’ नेताओं की छुट्टी, संघर्षशील चेहरों को मौका
जारी आधिकारिक आदेश में साफ कर दिया गया है कि अब संगठन में पदों का बंटवारा सिर्फ रसूख या सिफारिश के दम पर नहीं होगा। नई नियुक्तियों के लिए कड़े पैमाने तय किए गए हैं:
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सक्रियता और ग्राउंड रिपोर्ट: केवल उन्हीं महिला नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी जो लगातार जमीन पर सक्रिय हैं।
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सदस्यता अभियान में योगदान: जिन्होंने संगठन के विस्तार और डिजिटल/भौतिक सदस्यता अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है।
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जनसंपर्क और जुझारूपन: जनता के मुद्दों पर सड़क पर उतरकर संघर्ष करने वाली महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी।
संगठन का दावा: महिला कांग्रेस का यह पूरा पुनर्गठन किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि व्यापक चर्चा, जमीनी फीडबैक और सर्वसम्मति के बाद ही किया जाएगा, ताकि आगामी चुनौतियों से पूरी मजबूती से निपटा जा सके।
इन दिग्गज नेताओं को भेजी गई आदेश की कॉपी
इस फैसले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आदेश जारी होते ही इसकी प्रतिलिपि (कॉपी) कांग्रेस के राष्ट्रीय आलाकमान से लेकर छत्तीसगढ़ के तमाम शीर्ष नेताओं को तुरंत मार्क की गई है:
| राष्ट्रीय नेतृत्व | प्रदेश नेतृत्व (छत्तीसगढ़) |
|---|---|
| मल्लिकार्जुन खड़गे (राष्ट्रीय अध्यक्ष) | भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री) |
| केसी वेणुगोपाल (महासचिव, संगठन) | टी.एस. सिंह देव (पूर्व उप-मुख्यमंत्री) |
| सचिन पायलट (प्रदेश प्रभारी) | दीपक बैज (पीसीसी अध्यक्ष) & डॉ. चरण दास महंत (नेता प्रतिपक्ष) |
राजनीतिक मायने: निष्क्रियता पर गाज और आगामी चुनावों की बिसात
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ समय से महिला कांग्रेस के भीतर सांगठनिक सुस्ती और गुटबाजी की खबरें आ रही थीं। अलका लांबा का यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसा फैसला साफ संदेश देता है कि पार्टी अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस में कई नए और युवा चेहरे देखने को मिल सकते हैं। इस बड़े बदलाव को आगामी चुनावी रणनीतियों और जमीनी स्तर पर एक मजबूत, स्वतंत्र महिला विंग तैयार करने की कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।







