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परंपरा पर भारी सुरक्षा: 14 दिन बाद भी क्यों नहीं हुआ खामनेई का अंतिम संस्कार?

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नई दिल्ली/ तेहरान | 14 मार्च : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत को 14 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनका पार्थिव शरीर अब भी सुपुर्द-ए-खाक (दफन) होने का इंतजार कर रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के कथित संयुक्त हवाई हमले में मारे गए खामनेई का अंतिम संस्कार टलने से पूरी दुनिया में अटकलों का बाजार गर्म है। शिया इस्लाम की परंपरा के अनुसार, निधन के 24 घंटे के भीतर दफनाने की रस्म पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन ईरान सरकार फिलहाल ‘सुरक्षा बनाम श्रद्धा’ की बड़ी दुविधा में फंसी है।

हवाई हमले का डर और सुरक्षा की चुनौती

सूत्रों के मुताबिक, अंतिम संस्कार में देरी की सबसे बड़ी वजह इजरायली हमले का डर है। ईरानी खुफिया तंत्र को अंदेशा है कि जब लाखों की भीड़ अपने नेता को अंतिम विदाई देने सड़कों पर उतरेगी, तब भीड़ या नेतृत्व को निशाना बनाकर दोबारा हवाई हमला किया जा सकता है। 1989 में खुमैनी के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे; खामनेई के मामले में भी ऐसी ही भीड़ जुटने की उम्मीद है, जिसे युद्ध जैसी स्थिति में सुरक्षा देना एक बड़ी चुनौती है।

कोल्ड स्टोरेज में पार्थिव शरीर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस्लाम में ‘एम्बाल्मिंग’ (रासायनिक लेप) वर्जित है। ऐसे में खामनेई के पार्थिव शरीर को एक गुप्त और अत्यंत सुरक्षित स्थान पर नियंत्रित तापमान (Cold Storage) में रखा गया है। जानकारों का कहना है कि असाधारण परिस्थितियों या युद्ध काल में इस्लामी विद्वान शव को सुरक्षित रखने की अनुमति देते हैं, ताकि उचित समय पर गरिमा के साथ अंतिम संस्कार किया जा सके।

मशहद में दी जा सकती है अंतिम विदाई

माना जा रहा है कि खामनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में ‘इमाम रजा श्राइन’ के समीप दफनाया जाएगा। शिया परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार इन चरणों में होगा:

  • ग़ुस्ल और हनूत: पवित्र जल से स्नान और शरीर के सात अंगों पर कपूर लगाना।

  • कफ़न और नमाज़: पांच सफेद चादरों का कफन और पांच ‘तकबीर’ वाली विशेष शिया नमाज।

  • किबला रुख: शव को दाईं करवट पर मक्का (किबला) की ओर चेहरा करके लिटाना।

रणनीतिक सस्पेंस: ईरान फिलहाल उस ‘सुरक्षित पल’ की तलाश में है, जब वह बिना किसी सैन्य चूक के अपने सबसे शक्तिशाली नेता को विदाई दे सके। यह देरी मध्य-पूर्व में चरम पर पहुंचे तनाव की गवाही दे रही है।

संक्षेप में: यह जानकारी ईरान के सरकारी टेलीविजन, NDTV, CNN-News18 और Wikipedia (2026 के अपडेट्स) जैसे स्रोतों पर आधारित है। सुरक्षा कारणों से जनाजे में देरी की खबर हाल ही के दिनों में (मार्च 2026 के दूसरे हफ्ते में) अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में रही है।


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