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पश्चिम एशिया संकट: अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा हुई महंगी, 46,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द; यात्रियों की जेब पर भारी बोझ

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नई दिल्ली, 14 मार्च: पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष ने वैश्विक विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) को हिला कर रख दिया है। युद्ध की वजह से न केवल उड़ानें बाधित हो रही हैं, बल्कि हवाई किरायों में भी जबरदस्त उछाल आया है। विशेषकर भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाले यात्रियों को अब अपनी जेब काफी ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।


प्रमुख बिंदु:

  • उड़ानों पर संकट: न्यूज़ एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में 46,000 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।

  • क्षमता में गिरावट: सीरियम के आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में वैश्विक एयरलाइन क्षमता में 10% की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद विमानन क्षेत्र के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है।

  • हब का संकट: दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे बड़े ट्रांजिट हब के प्रभावित होने से एशिया और यूरोप के बीच का सीधा संपर्क टूट रहा है। गौरतलब है कि इस रूट का करीब एक तिहाई हिस्सा (लगभग 4 करोड़ यात्री) इन्हीं खाड़ी देशों से होकर गुजरता है।

  • किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी: * सिडनी से लंदन का इकोनॉमी रिटर्न टिकट महज 15 दिनों में 80% महंगा हो गया है।

    • सिंगापुर से लंदन का किराया अब पहले के मुकाबले तीन गुना ज्यादा हो चुका है।

  • ईंधन की मार: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण एयरलाइंस ने ‘फ्यूल सरचार्ज’ लगाना शुरू कर दिया है, जिससे टिकटों की कीमतें और बढ़ गई हैं।

भारतीय यात्रियों पर प्रभाव:

भारत से जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का लगभग 40% हिस्सा पश्चिम एशिया के ट्रांजिट हब से होकर गुजरता है। यात्रा मार्ग बदलने के कारण उड़ानों का समय बढ़ गया है और ईंधन की खपत भी ज्यादा हो रही है, जिसका सीधा असर किराए पर पड़ रहा है। ईस्टर के दौरान यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।

यात्रियों के लिए सलाह:

विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों को अंतिम समय की बुकिंग से बचना चाहिए। साथ ही, यात्रा की तारीखों में लचीलापन रखने और ट्रैवल इंश्योरेंस लेने की सलाह दी गई है ताकि अचानक कैंसिलेशन की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।


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