मुख्य बिंदु:
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भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया।
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सोशल मीडिया पर अपनी ही सरकार से डीएमएफ (DMF) फंड को लेकर सवाल उठाने पर पार्टी ने जारी किया था नोटिस।
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रवि भगत के इस्तीफे से स्थानीय संगठन और युवाओं के बीच हलचल तेज, कांग्रेस ने साधा निशाना।
पूरी खबर: अनुशासनहीनता के नोटिस के बाद रवि भगत का पार्टी को ‘टाटा बाय-बाय’
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रायपुर/बिलासपुर 1 जुलाई : छत्तीसगढ़ की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्य में एक बड़ा झटका लगा है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और युवाओं के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले नेता रवि भगत ने पार्टी से अपना सालों पुराना नाता तोड़ लिया है। रवि भगत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स और मीडिया बयानों के जरिए पार्टी को ‘टाटा बाय-बाय’ कहते हुए अपने इस्तीफे का ऐलान किया। युवा विंग के पूर्व अध्यक्ष होने के नाते रवि भगत की युवाओं के बीच अच्छी पैठ मानी जाती थी, ऐसे में उनके इस अचानक फैसले से भाजपा के स्थानीय संगठन और सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
नाराजगी या नई राह? इस्तीफे के पीछे की इनसाइड स्टोरी
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा लंबे समय से तेज थी कि रवि भगत पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर उपेक्षित महसूस कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने अपने आधिकारिक त्यागपत्र में इस्तीफे की वजह ‘व्यक्तिगत कारणों’ को बताया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे पार्टी के कुछ हालिया फैसलों और कार्यशैली से सख्त असहमत थे।
विवाद की जड़: सोशल मीडिया पोस्ट और ‘कारण बताओ नोटिस’
इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब रवि भगत को भाजपा संगठन द्वारा एक ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया। यह नोटिस भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव की सहमति के बाद जारी हुआ था।
नोटिस में क्या लिखा था?
भाजपा द्वारा जारी नोटिस में रवि भगत पर अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगाए गए थे। नोटिस में लिखा था:
“सोशल मीडिया में आपके द्वारा लगातार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। आपका यह कृत्य पार्टी अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव जी ने आपको अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अतः इस नोटिस मिलने के सात दिवस के अंदर अपनी स्थिति स्पष्ट करें कि क्यों न आपके विरुद्ध पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने की कार्यवाही की जाए।”
आखिर रवि भगत ने क्या किया था?
दरअसल, रवि भगत ने पिछले दिनों अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने गाना गाकर अनोखे अंदाज में अपनी ही सरकार से विकास कार्यों को लेकर मांग की थी। उन्होंने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की राशि जारी न होने पर सवाल उठाए थे।
रवि भगत ने अपील की थी कि डीएमएफ (DMF) की राशि को गांवों के विकास में ही खर्च करने के लिए सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, और पेयजल जैसे कई बुनियादी विकास कार्य इसी राशि से पूरे होते हैं। हालांकि, इस पोस्ट को लेकर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इसे एक सामान्य मांग बताया था, लेकिन संगठन ने इसे अनुशासनहीनता माना।
विपक्ष (कांग्रेस) ने बनाया बड़ा मुद्दा, सरकार को घेरा
अपनी ही सरकार के खिलाफ भाजपा युवा नेता के इस बागी रुख को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने हाथों-हाथ लिया और साय सरकार पर जमकर हमला बोला।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने तीखा तंज कसते हुए कहा था कि :
“रीढ़ विहीन भाजपाइयों के लिए रवि भगत ने एक प्रतिमान स्थापित किया है। भाजपा के सुशासन के तमाम दावों की पोल खुल चुकी है। रवि के गाने में एक छत्तीसगढ़िया और आम आदिवासी युवा की पीड़ा साफ तौर पर दिख रही है। पूरे प्रदेश में डीएमएफ फंड की बंदरबांट हो रही है। खनन और उद्योग प्रभावित क्षेत्र के लोगों का हक मारकर, सिर्फ कमीशनखोरी के चक्कर में डीएमएफ और सीएसआर (CSR) फंड की राशि को फूंका जा रहा है।”
कांग्रेस ने आगे आरोप लगाया था कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र सरगुजा और बस्तर में ग्राम सभा के अधिकारों को दरकिनार करके खनिज संसाधनों को लूटा जा रहा है। सरकार ‘रिमोट’ से चल रही है और खुद भाजपा के नेता भी अनभिज्ञ हैं कि सरकार आखिर चला कौन रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जब भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष की ही सुनवाई नहीं हो रही है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मांग कहाँ रखें, तो आम जनता का क्या हाल होगा। इसी कॉरपोरेट लूट से आहत होकर भाजपाई अब सोशल मीडिया पर रोने को मजबूर हैं।
आगे क्या?
रवि भगत के इस इस्तीफे के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा में आंतरिक असंतोष की बातें खुलकर सामने आ गई हैं। अब देखना यह होगा कि रवि भगत का अगला राजनीतिक कदम क्या होता है—क्या वे कांग्रेस का दामन थामेंगे या किसी नई राह पर निकलेंगे?







