बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ में होली का पर्व इस बार दो अलग-अलग तस्वीरों के साथ गुजरा। जहाँ राजधानी रायपुर के ग्रामीण इलाकों में महज 5 घंटों के भीतर हुई 3 हत्याओं ने कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं, वहीं न्यायधानी बिलासपुर में पुलिस की अभेद्य रणनीति और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के कारण त्यौहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
बिलासपुर: एसएसपी की 72 घंटे की ‘नॉन-स्टॉप’ मॉनिटरिंग
बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह के नेतृत्व में जिले की पुलिस ने इस बार सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह रचा कि असामाजिक तत्व अपने ठिकानों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
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मैदान में डटे रहे अफसर: एसएसपी खुद सड़कों पर उतरे और करीब 72 घंटों तक लगातार निगरानी की कमान संभाली। उनके साथ एएसपी पंकज पटेल, मधुलिका सिंह, रामगोपाल करियारे और सीएसपी स्तर के अधिकारी दिन-रात पेट्रोलिंग करते रहे।
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जवानों का बढ़ाया हौसला: एसएसपी ने ड्यूटी पर तैनात जवानों से हाथ मिलाया और भीषण गर्मी व त्यौहार के बीच उनकी मुस्तैदी की सराहना की।
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कड़ी कार्रवाई: जो बदमाश अपराध से तौबा नहीं कर रहे थे, उन्हें त्यौहार से पहले ही सलाखों के पीछे भेजा गया, जिससे शहर और देहात के चौक-चौराहों पर महिलाएं और बच्चे निर्भीक होकर होली खेलते नजर आए।
रायपुर: कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
राजधानी रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति इसके उलट रही। होली की खुशियों के बीच महज 5 घंटों के अंतराल में हुई तीन हत्या की वारदातों ने पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इन घटनाओं ने त्यौहार के रंग में भंग डाल दिया और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी।
एसएसपी का संदेश: “नशे को कहें ना, जीवन को कहें हां”
बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने इस शांतिपूर्ण माहौल का श्रेय ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ और जनता के सहयोग को दिया। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे नशे और अपराध की दुनिया से दूर रहकर देश के भविष्य निर्माण में योगदान दें।
“पिछले वर्षों की तुलना में इस बार विवाद न के बराबर हुए। हमारी रणनीति का मकसद था कि हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे। यह बिलासपुरवासियों के सहयोग से ही संभव हुआ है।” > — रजनेश सिंह, एसएसपी, बिलासपुर








